OMG! रक्षाबंधन पर नहीं पहुंचा भाई, नाराज बहन ने खा लिया जहर

महिला ने धनबाद में रहने वाले अपने भाई राकेश महतो को रक्षा बंधन के मौके पर आने को कहा था. राकेश महतो ने अपनी जरूरी व्यस्तताओं का हवाला देते हुए आने में असमर्थता जताई.

Published date india.com Published: August 31, 2023 3:25 PM IST
Rakhi

रक्षाबंधन पर राखी बंधवाने के लिए भाई के ना पहुंचने से नाराज होकर एक महिला ने जहर खाकर जान देने की कोशिश की. उसे गंभीर हालत में इलाज के लिए हॉस्पिटल में दाखिल कराया गया है. घटना झारखंड में धनबाद जिले के टुंडी की है. यहां विवाहिता महिला ने धनबाद में रहने वाले अपने भाई राकेश महतो को रक्षा बंधन के मौके पर आने को कहा था. राकेश महतो ने अपनी जरूरी व्यस्तताओं का हवाला देते हुए आने में असमर्थता जताई.

बताया गया कि यही बात बहन को नागवार गुजरी और उसने घर में रखा कीटनाशक खा लिया. घर के लोगों ने उसे धनबाद स्थित शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में दाखिल कराया है. चिकित्सकों के अनुसार महिला की स्थिति में सुधार है. इधर महिला के भाई राकेश महतो ने कहा कि उसे पता नहीं था कि बहन इस तरह का अप्रत्याशित कदम उठा लेगी. वह आगे से किसी भी हाल में रक्षाबंधन पर बहन के पास पहुंचेगा.

मालूम हो कि वहीं भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन में इस बार आगरा में गोबर की ऐसी राखी तैयार की गई है जो कि ना सिर्फ हाथों की कलाई में तो सजेगी. बल्कि नष्ट होने पर तुलसी का पौधा भी उगाएगी. यह बंधन आध्यात्म,आस्था और विश्वास के डोर को और प्रबल करेगी. रक्षाबंधन के लिए आगरा में नगर निगम ने लव यू जिंदगी फाउंडेशन के साथ मिलकर ईको फ्रेंडली राखियां बनाई हैं. बिक्री के लिए नगर निगम और शहर के अन्य जगह पर स्टॉल लगाई गई है.

फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रंकुर जैन कहते हैं कि रक्षा बंधन में देखने को मिलता है कि बाजार में प्लास्टिक और अन्य सामग्री से राखी तैयार की जाती है, जो की पर्यावरण के लिए नुकसान पहुंचाती है. इन्हीं सबको ध्यान में रखते हुए हमने गाय के गोबर से राखी तैयार की है जो की पर्यावरण को शुद्ध तो रखेगी साथ ही आपके घर के गमले को हरियाली प्रदान करेगी इन राखियों को बनाने में केवल गाय के गोबर का इस्तेमाल किया गया है.

ये गोबर भी नगर निगम द्वारा संचालित कान्हा उपवन गोशाला की गाय का है. उन्होंने बताया कि इन राखियों को सुंदर बनाने के लिए इस पर खास सजावट की गई है. इसके अलावा इन राखियों में तुलसी की मंजरी को डाला गया है, जिससे जब इन राखियों को त्योहार के बाद गमले में या किसी पार्क में रखा जाएगा तो उसमें घुल जाएंगी.

इसमें रखे बीज से तुलसी के पौधे पैदा हो जाएंगे. इससे पर्यावरण को फायदा होगा. यह शहर में कई जगह स्टालों में बेचा जा रहा है. इसकी कीमत 25 रुपए है. आने वाले दिनों में अन्य चीजे भी तैयार की जायेंगी. हम गाय की गोबर की उपयोगिता पर ध्यान दे रहे है. इससे पर्यावरण को बढ़ावा तो मिलेगा ही साथ ही सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगी. गौ वंश की रक्षा और रोजगार भी मिलेगा. (एजेंसी इनपुट्स)

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