नई दिल्ली: उत्तर पूर्वी भारत में छठ पूजा को दीपावली से भी बड़ा त्यौहार माना जाता है. यह त्यौहार दीपावली के छठवें दिन मनाया जाता है इसलिए इसे सूर्य षष्ठी व्रत या छठ कहते हैं. हिन्दू कैलेंडर के मुताबिक यह त्यौहार दो बार चैत्र और कार्तिक महीने में मनाया जाता है. यह त्यौहार बिहार सबसे ज्यादा लोकप्रिय है. इसे पारिवारिक सुख-समृद्धि और मनोवांछित फल-प्राप्ति के लिए मनाया जाता है.
छठ मनाने के पीछे कई कहानिया प्रचलित हैं. इन्हीं में से एक है पौराणिक कथाओं में कर्ण की कहानी. इन मान्यताओं के मुताबिक अंगराज कर्ण से इस पर्व की शुरुआत होती है. बिहार का भागलपुर जिला इतिहास के पन्नों में ‘अंग प्रदेश’ के नाम से दर्ज है. हिन्दू मान्याताओं के अनुसार कुंती और सूर्य देव की संतान अंग राज कर्ण अपना आराध्य देव सूर्य देव को मानते थे. कर्ण अपनी आस्था के अनुसार कमर तक पानी में जाकर सूर्य देव की आराधना करते थे और जरुरतमंदों को दान भी किया करते थे.
कार्तिक शुक्ल षष्ठी और सप्तमी के दिन कर्ण सूर्य देव की विशेष पूजा किया करते थे. राजा कर्ण की सूर्य भक्ति से प्रभावित होकर अंग की प्रजा भी सूर्य देव की आराधना करने लगी. धीरे-धीरे यह त्यौहार के रूप में अंग प्रदेश के अलावा पूर्वांचल और बिहार के अन्य इलकों में भी मनाया जाने लगा.
आरा
छठ पूजा के दिन सूर्योदय – 05:55 बजे सुबह
छठ पूजा के दिन सूर्यास्त– 17:14 बजे शाम
दरभंगा
छठ पूजा के दिन सूर्योदय – 05:51 बजे सुबह
छठ पूजा के दिन सूर्यास्त– 17:08 बजे शाम
मुजफ्फरपुर
छठ पूजा के दिन सूर्योदय – 05:53 बजे सुबह
छठ पूजा के दिन सूर्यास्त– 17:10 बजे शाम
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पुर्निया
छठ पूजा के दिन सूर्योदय – 05:44 बजे सुबह
छठ पूजा के दिन सूर्यास्त– 17:03 बजे शाम
कटिहार
छठ पूजा के दिन सूर्योदय – 05:44 बजे सुबह
छठ पूजा के दिन सूर्यास्त– 17:02 बजे शाम
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