नई दिल्ली: कोरोना (Corona Virus) के मरीज बढ़ने की आशंका और लॉकडाउन से ठीक पहले पूरे देश के बाज़ारों में मास्क (Mask) और सेनिटाइजर की कमी पड़ गई. शहर क्या, कस्बाई और ग्रामीण इलाकों में भी ये दोनों चीज़ें लोगों तक नहीं पहुंच सकीं. इस बीच विनोद बौद्ध के दिमाग में विचार आया और मार्किट से थोक में कपड़ा खरीदा. घर की मशीन का इस्तेमाल किया. मास्क बनाने की कोशिशें शुरू कर दीं. और कामयाबी भी मिल गई. Also Read - Centre vs Delhi Govt ON Vaccine: डिप्‍टी CM सिसोदिया बोले- दिल्‍ली में 100 वैक्‍सीनेशन सेंटर बंद करने पड़े

कोशिश की और मिली कामयाबी
कोरोना (Corona Virus) देश के लिए मुसीबत बना हुआ है. ये ऐसा समय है जब सिर्फ सरकारों और सिस्टम की ओर ही ‘सब कुछ करने’ के लिए ताकना अपने ही लिए घातक सिद्ध हो सकता है. यही सोचते हुए मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के निवाड़ी जिले में रहने वाले विनोद बौद्ध कुछ ऐसा कर रहे हैं, जिससे कई लोग प्रेरित भी हुए हैं. पेशे से आर्किटेक्ट विनोद बौद्ध बताते हैं कि अचानक बाज़ार में मास्क की कमी हो गई. गांवों-कस्बों में लोग मास्क के लिए परेशान हो गए. ऐसे में उनके दिमाग में मास्क बनाने का विचार आया और जनता कर्फ्यू के ठीक एक दिन पहले कॉटन का कपड़ा खरीद लिया. उन्होंने कई मीटर कपड़ा लिया. बाज़ार के सर्जिकल मास्क का साइज़ और डिज़ाइन देखा और कपड़े को काट मास्क बनाने की कोशिश में जुट गए. एक बार की कोशिश के बाद ही वह मास्क बनाने में कामयाब हो गए. Also Read - Lockdown In Assam: असम में 13 मई की सुबह 5 बजे से सख्त लॉकडाउन का आदेश, जानिए गाइडलाइंस

जेल में कैदियों और पुलिस को दिए मास्क, कई लोग भी हुए प्रेरित
विनोद बौद्ध बताते हैं कि वह अब तक करीब 300 मास्क बना चुके हैं. रोज 20 से 25 मास्क बना रहे हैं. विनोद ये मास्क मोहल्ले के लोगों को बाँटने के साथ ही जेल, अस्पताल, पुलिस स्टेशन और जिला प्रशासन के अधिकारियों को मास्क दे चुके हैं. अधिकारी उनकी कोशिशों की सराहना कर रहे हैं. विनोद बौद्ध बताते हैं कि जैसे टाइम मिलता है वैसे ही बनाने में जुट जाते हैं. इलाके के कुछ लोग भी उनकी देखा देखी में मास्क बनाने लगे रहे हैं. कई लोग उनसे प्रेरित हुए हैं. और मास्क बनाने की होड़ सी लगी है. Also Read - Corona Pandemic: कब खत्‍म होगी Covid19 महामारी? सुप्रसिद्ध वायरोलॉज‍ि‍स्‍ट ने दिया ये जवाब