आप इस बात पर यकीन करेंगे की गाय ने एक गावं को पूरी तरह से बदल दिया हैं। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के इमलिया गौंडी गांव के लोगों की जिंदगी में उस वक्त बड़ा बदलाव आया जब उन्होंने अपने गावं में गौ-पालन शुरू कर दिया। गौ-पालन से गावं मे एक तरफ जहां वह लोगों के रोजगार का जरिया बन गई है, तो वहीं दूसरी तरफ गाय की सौगंध खाकर लोग नशा न करने का संकल्प भी ले रहे हैं। इसका असर इतना ज्यादा है की अधिकांश गावंवाले इसका अनुसरण करने लगे हैं।Also Read - Gaay Ke Sath Na Kare Ye Galti: गाय के साथ भूलकर भी कभी ना करें ये काम, काफी भारी पड़ सकती है ये गलती

इस गावं में आते ही आप की आंखो के सामने ‘गौ संवर्धन गांव’ की छवि उभरने लगेगी। इस गावं में भोपाल स्थित गायत्री शक्तिपीठ ने जंगल में गौशाला स्थापित की गई है। अब उनलोगों के पास गाय दिया जा रहा है जिनके पास इतने पैसे नही है की कोई गाय खरीद सके। अब इसका परिणाम यह है की गावं के लोगो को इससे दूध तो प्राप्त करतें हैं उसके आलावा गाय के गोबर से बनी उपली का उपयोग कर के वो अच्छी खासी रकम भी कमा लेतें हैं। इस गांव में 2500 की आबादी है और लगभग 450 घर हैं। इस गांव में अब तक 150 गाय गौशाला की ओर से दी जा चुकी है। Also Read - इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- केंद्र सरकार गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करे, गौरक्षा हिन्दुओं का मौलिक अधिकार

गायत्री शक्तिपीठ द्वारा अभी तक 150 परिवारों को गाय उपलब्ध कराई जा चुकी है। इस शक्तिपीठ ने अब गावं के लोगो को औषधियां बनान सिखा रही है। जिसमें गाय की मूत्र से औषधियां बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। अब इस गावं का आलम यह है की यहां पर रहने वाले 95 प्रतिशत लोगों ने नशा करना छोड़ दिया है और गाय पालन कर के कुछ पैसे कमा लेतें हैं वहीं अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या का कहना है कि ‘गौ-संरक्षण, गौ-पालन, गौ-संवर्धन सबका कर्तव्य है। गौ-सेवा के साथ पंचगव्य आधारित उत्पादों की दिशा में कार्य होने चाहिए। Also Read - हरियाणा के इस गांव में हटाए जाएंगे 10 हजार घर, सदमे में लोग; एक व्यक्ति ने की आत्महत्या