Diwali 2020 Preprations: अपने राम के लिए दुल्हन की तरह सज रही अयोध्या के दीपोत्सव में इस बार लक्ष्मणनगरी की बनी मूर्तियां अपनी चमक से लोगों का मन मोह लेंगी. यह आकर्षण का केन्द्र रहेंगी. Also Read - UP में स्‍कूल के रास्‍ते में गायब हुईं 4 लड़कियां अभी भी लापता, स्‍कूल की यूनिफार्म बदलने के बाद CCTV Footage में आईं थी नजर

संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा लखनऊ के राज्य ललित कला अकादमी द्वारा अयोध्या में 13 नवंबर को ‘जन जन के राम’ विषय पर 25 मूर्तियों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी. Also Read - Abhyudaya Yojana: UP की योगी सरकार 10 लाख युवाओं को देगी फ्री में टैबलेट, कैसे मिलेगा, जानें यहां पूरी डिटेल

राम कथा पार्क में लगने वाली इस प्रदर्शनी में कानपुर, बनारस, प्रयागराज, मथुरा, लखनऊ के मूर्तिकारों द्वारा तैयार कलाकृतियों में प्रभु श्रीराम के भाव, दया, प्रेम की झलक नजर आएगी. Also Read - Petrol-Diesel की बढ़ती कीमतों पर Mayawati- Akhilesh Yadav ने केंद्र और यूपी की योगी सरकार पर हमला बोला

मूर्तिशिल्प कलाकार द्वारा फाइवर, टेराकोटा और लकड़ी में मूर्तियों को ढाल मूर्तिकला शैलियों की विशेषताओं से आम जनमानस को रूबरू कराएंगे.

प्रदर्शनी में अहिल्या उद्धार, केवट प्रसंग, राम के अनूठे रूपों के दर्शन, राम लक्ष्मण प्रेम, भरत मिलाप जैसे कई प्रसंगों का प्रदर्शन मूर्तियों में किया जाएगा.

चित्रकूट के मूर्तिकार अनुज मिश्रा कहते हैं कि, अयोध्या में शिल्पकारों की कलाकृतियों को प्रदर्शित किया जा रहा है. श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट के लोग श्रीराम को हमेशा से राजा के रूप में देखना चाहते हैं. लगभग पांच फुट की मूर्ति में श्रीराम को राजा राम का विराट स्वरूप नजर आएगा.

सच्चिदानंद और जीऊतवली यादव ने बताया कि मर्यादा पुरूषोत्तम राम ने ‘अहिल्या उद्धार’ के जरिए समाज को नारी सम्मान का संदेश दिया था. उस प्रसंग को मूर्ति में ढाल नारी सम्मान के प्रति लोगों को मिशन शक्ति के तहत जागरूक करेंगे.

लखनऊ के मूर्तिकार पारूल श्रीवास्तव ने बताया कि ‘जटायु प्रसंग’ पर आधारित मूर्ति अयोध्या में प्रदर्शित की जाएगी. ये मेरे लिए खुशी की बात है. अंबेडकर नगर के उदय राज मौर्या ने कहा कि राम लक्ष्मण के सेतु निर्माण के समय के दृश्य पर आधारित मूर्ति बनाई है, जो प्रदर्शनी में लगेगी.

ज्ञात हो कि लखनऊ के कैसरबाग के राज्य ललित कला अकादमी में नौ दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया था. जहां अलग-अलग जनपदों के मूर्तिकारों ने श्रीराम की तीस मूर्तियों को गढ़ा था.
(एजेंसी से इनपुट)