Geminid Meteor Shower 2020: देशभर में आज रात और सोमवार तड़के उल्का पिंडों की बौछार से आकाश जगमगा उठेगा. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) की एक रिपोर्ट के अनुसार पीक ऑवर्स के दौरान प्रति घंटे में 120 जेमिनीड उल्कापिंडों को देखा जा सकता है. उधर, एमपी बिड़ला तारामंडल के निदेशक देवीप्रसाद दुआरी ने बताया कि ‘जैमिनिड’ के नाम से जानी जाने वाली उल्का पिंडों (Meteor) की यह बौछार 13 दिसंबर की रात को चरम पर होगी. यह वर्ष की सबसे बड़ी उल्का पिंड बौछार होगी. उन्होंने कहा कि अगर आसमान में परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो जेमिनिड उल्का पिंड बौछार को भारत के हर हिस्से से देखा जा सकेगा. Also Read - कौन हैं Swati Mohan? जिन्होंने Nasa के Mars Mission को बनाया ऐतिहासिक

उल्का पिंड चमकदार रोशनी की जगमगाती धारियां होती हैं, जिन्हें अक्सर रात में आसमान में देखा जा सकता है. इन्हें ‘शूटिंग स्टार’ भी कहा जाता है. उन्होंने बताया कि वास्तव में, जब धूल के कण जितनी छोटी एक चट्टानी वस्तु बेहद तेज गति से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती है, तो घर्षण के कारण प्रकाश की खूबसूरत धारी बनती है. Also Read - Mars Planet Images: नासा ने जारी की मंगल की लेटेस्ट तस्वीरें, दिखा लाल गृह का वीरान दृश्य; देखिए कैसी है वहां की दुनिया

Also Read - NASA Perseverance Rover Landing Video: नासा ने जारी किया मंगल ग्रह का पहला वीडियो, सुनें हाई डेफिनेशन आवाज

साल की एक निश्चित अवधि में आकाश की निश्चित दिशा से आते एक नहीं, बल्कि कई उल्का पिंड देखने को मिलते हैं, जिन्हें उल्का पिंड बौछार कहा जाता है. ये बौछार अकसर उस समय होती है, जब पृथ्वी विभिन्न उल्का तारों के सूरज के निकट जाने के बाद छोड़ी गई धूल के बचे मलबे से गुजरती है. इनमें से जेमिनिड उल्का पिंड बौछार सबसे शानदार उल्का पिंड बौछारों में से एक होती है. हर बौछार हर साल दिसंबर के दूसरे सप्ताह के आस-पास दिखाई देती है. दुआरी ने बताया कि इस साल पूर्वानुमान है कि आसमान साफ होने के कारण प्रति घंटे 150 उल्का पिंछों की बौछार दिख सकती है.

(इनपुट: भाषा)