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महाशिवरात्रि के पर्व पर शहर से लेकर गांव तक बम-बम भोले की गूंज रहेगी। महाशिवरात्रि को लेकर मंदिरों में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। महाशिवरात्रि भगवान शिव का महापर्व हैं। साथ ही मान्यता है कि आज के दिन अगर कोई भगवान शिव से कुछ मांगता है तो उसकी इच्छा जरूर पूरी होती है। इस दिन भोलेनाथ की चारों प्रहरों में पूजा की जाती है।वही यह शिव को खुश करने का सबसे बड़ा अवसर है। इस दिन भोलेनाथ की चारों प्रहरों में पूजा की जाती है। प्रथम प्रहर में संकल्प लेकर दूध से स्नान तथा “ॐ ह्वीं ईशानाय नम:” मंत्र का जप करें। Also Read - बिहार : छठ पूजा के लिए शुरू हुईं तैयारियां, घाटों के दलदल ने प्रशासन की बढ़ाई चिंता

यह पर्व उपवास, पूजन और शिवलिंग के अभिषेक के साथ ही पूरा होता है। उन्होंने बताया कि रात का जागरण कम लोग ही करते हैं लेकिन रात के चार प्रहरों में किए जाने वाला यह जागरण काफी फलदायी होता है। Also Read - गंगा दशहरा पर लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्‍था की डुबकी, वाराणसी-इलाहाबाद में खासी भीड़

इस दिन प्रात: से प्रारंभ कर संपूर्ण रात्रि शिव महिमा का गुणगान करें और बिल्व पत्रों से पूजा अर्चना करें। रूद्राष्टाध्यायी पाठ, महामृत्युंजय जप, शिव पंचाक्षर मंत्र आदि के जप करने का विशेष महत्व है।
वहीं इस महापर्व में रात के जागरण का विशेष महत्व है।

क्या है रात का जागरण।
शिवरात्रि की रात यानि 17 फरवरी के सूर्यास्त और 18 फरवरी के सूर्योदय तक की जाने वाली पूजा को रात का जागरण कहेंगे। चारों प्रहर की पूजा के लिए सूर्यास्त से पहले स्नान आदि कर लेना चाहिए। इसमें रात के प्रत्येक प्रहर में भगवान शिव की पूजा की जाती है। पूजा की सामग्री दूध और जल से अभिषेक और शिवमंत्र के साथ पूजा की जाती है। प्रत्येक प्रहर के अंत में शिव आरती की जाती है। उन्होंने बताया कि घर में भी यह पूजा की जा सकती है।

महाशिवरात्रि महिमा।
पुराणों में वर्णित कथाओं में महाशिवरात्रि के महत्व को बताते हुए कहा गया है कि फाल्गुन कृष्णपक्ष चतुर्दशी भगवान शिव को अत्यन्त प्रिय है। भगवान शिव फाल्गुन कृष्णपक्ष चतुर्दशी को आधी रात में शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे, इसलिए इस रात्रि को महाशिवरात्रि कहा गया है। अर्धरात्रि में प्रकट होने के कारण जिस दिन अर्धरात्रि में चतुर्दशी तिथि रहती है, उस दिन महाशिवरात्रि व्रत रखा जाता है।

इसी दिन से महाशक्ति पार्वती द्वारा मानव सृष्टि के लिए द्वार खोले गए। शिवजी ने इसी दिन ब्रह्मा के रूप से रूद्र के रूप में अवतार लिया था। 17 फरवरी को अर्धरात्रि व्यापिनी चतुर्दशी तिथि है। शिवरात्रि पर अनेक ग्रन्थों में अनेक प्रकार से शिव आराधना और अनुष्ठान करने का वर्णन है।