पृथ्वी जो हमारी माँ की तरह है, जिसकी वजह से हमारा अस्तित्व है और जिसकी वजह से हमारी सभी ज़रूरते पूरी हो रही हैं, वही पृथ्वी आज बड़े खतरे से जूझ रही है। हाल ही में चेन्नई में आई बाढ़ और कुछ नहीं, बल्कि ग्लोबल वार्मिंग का ही नतीजा है। यह एक तरीका है प्रकृति का यह बताने का कि यह मानव जीवन के लिए एक खतरा हो सकता है। और यह खतरा कोई छोटा खतरा नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा खतरा है, जिसकी वजह से हमारा जीवन कभी भी ख़त्म हो सकता है। तो ऐसा होने की आखिर क्या वजह है? आइये हम आपको बताते हैं कि विज्ञानिकों ने इस बात पर क्या खुलासा किया है? Also Read - प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल चुके 6 राज्यों को केंद्र ने दी 4,382 करोड़ की सहायता, सबसे अधिक पश्चिम बंगाल को मिला

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जब दुनिया के ज़्यादातर देश ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से जूझ रहे हैं, तब पृथ्वी के अन्दर कुछ ऐसे बदलाव हो रहे हैं, जिसकी वजह से इंसान के जीवन के लिए खतरा बढ़ गया है। वैज्ञानिकों द्वारा किये गए एक अध्ययन में यह बात साबित हुई है कि समुद्र के तापमान में कुछ डिग्री की वृद्धि होने से पृथ्वी पर ऑक्सिजन की मात्रा कम हो रही है। ऑक्सीजन, जिसके बगैर कोई भी जीव जिंदा नहीं रह सकता, वह अब धरती पर कम होती चली जा रही है। इसी के चलते वैज्ञानिकों ने यह चेतावनी दी है कि इस वजह से बड़ी संख्या में इंसानों और जानवरों की मौत हो सकती है। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ लीसेस्टर के वैज्ञानिकों ने शोध के ज़रिये ये बताया है कि ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण ऑक्सिजन के स्तर में कमी आने से पृथ्वी पर कई भयानक प्राकृतिक आपदाएं आ सकती हैं। Also Read - 12 जिलों में बाढ़ का प्रकोप, पीड़ितों के बैंक खाते में राहत राशि भेज रही बिहार सरकार

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इस अध्ययन में ये खुलासा हुआ है कि 2010 से अब तक पृथ्वी के तापमान में लगभग 6 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है, जिसकी वजह से ऑक्सीजन का बनना कम हो सकता है। यूनिवर्सिटी के गणित विभाग के प्रोफेसर सर्गेई पेट्रोव्स्की ने बताया कि सबसे बड़ा खतरा हमें अंटाकर्टिक की बर्फ पिघलने से होगा, जिसकी वजह से दुनिया के कई हिस्सों में भयानक बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा। और साथ ही इस ग्लोबल वार्मिंग की वजह से सन 2100 तक ऑक्सीजन की मात्रा में बड़ी कमी आएगी।