Hakka Shah Mazar: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के शहर गोरखपुर से 38 किमी दक्षिण-पूर्व गजपुर कस्बे में स्थित हक्का शाह की मजार गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है. मजार पर दोनों समुदायों (हिन्दू-मुस्लिम) के लोग मन्नत मांगने या मन्‍नत पूरी होने पर समान श्रद्धा से जाते हैं.Also Read - सुना है कि बीजेपी अपने 150 MLA के टिकट काटने जा रही... हमने 300 सीटों को पार कर लिया: अखिलेश यादव

मान्यता है कि पांच गुरुवार को लगातार सच्चे मन से मजार पर पहुंचने वाले की मुराद जरूर पूरी होती है. आज भी यहां की साफ-सफाई, भोग से लेकर चढ़ावा तक की व्यवस्था कस्बे के माली परिवार के जिम्मे है. जहां दीपावली को मजार दीये की रोशनी से जगमगा उठते हैं, तो वहीं होली को यह अबीर-गुलाल से सराबोर दिखती है. Also Read - UP: PM मोदी 25 अक्टूबर को सिद्धार्थनगर से 7 मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन करेंगे, CM योगी ने दी ये जानकारी

यहां आने की कहानी है दिलचस्प
हक्का शाह के यहां आने के के बारे में एक रोचक कथा प्रचलित है. कस्बे में ही घूरहू और लचिया नाम के नि:संतान माली दंपति रहते थे. एक दिन बाघ पर सवार होकर एक महात्मा आए, जिसे देखकर वे डर गए, तब उस महात्मा ने माली दंपति से कहा डरो मत यह बाघ कुछ नहीं करेगा. उन्होंने दंपति से कुछ खाने को मांगा. माली दंपति ने जेवर बंधक रखकर महात्मा के खाने का प्रबंध किया. Also Read - UP Madarsa News: यूपी के मदरसों में अब इन विषयों की भी होगी पढ़ाई, सरकार ने किया अनिवार्य...

महात्मा को जौ-मटर की रोटी व गिन्नी का साग परोसा गया. महात्मा तब से यहीं रहने लगे, उक्त दंपति भी उनकी आवभगत करने लगे. दरअसल वह महात्मा हक्का शाह ही थे.

उनके सेवा भाव से खुश होकर महात्मा ने नि:संतान दंपति से कुछ मांगने को कहा. वृद्ध हो चले दंपति कुछ कह नहीं पा रहे थे जिस पर महात्मा ने लचिया के सिर के बाल खींचकर पीठ पर पांच मुक्के मारे जिससे नि: संतान दंपति को कालांतर में सुजान, मेहरबान, पहलवान, मर्दन व गर्दन नामक पांच पुत्र पैदा हुए. इसके बाद हक्का शाह की ख्याति पूरे कस्बे व आसपास के क्षेत्र में फैल गई.

गजपुर कस्बे में हक्का शाह के मजार पर हर गुरुवार की शाम को दोनों संप्रदाय के लोग जुटते हैं. अपने-अपने पद्धत‍ि के अनुसार यहां लोग कपूर, अगरबत्ती, लोहबान व दीपक से पूजा-इबादत करते हैं और खुरमा का प्रसाद चढ़ाकर मन्‍नत मांगते हैं.

कस्बे के सभी माली परिवार अपने समस्त मांगलिक कार्यक्रम हक्का शाह के मजार पर संपन्न करते हैं. यहां के सालाना उर्स के आयोजन में दोनों संप्रदायों का योगदान होता है. मजार का जीर्णोद्घार भी दोनों संप्रदायों ने मिलकर कराया है.
(एजेंसी से इनपुट)