नई दिल्ली. भारतीय वायुसेना के गरुड़ कमांडो रहे शहीद ज्योति प्रकाश निराला की बहन शशिकला की शादी कई मायनों में खास थी. शशिकला के लिए यह मौका भावुक कर देने वाला था, क्योंकि उनका इकलौता भाई शादी के इस मौके पर उसके साथ मौजूद नहीं था. मगर उसकी जगह, भाई के साथी 50 कमांडो शशिकला के भाई बनकर पहुंचे थे. वायुसेना के गरुड़ दस्ते के ये 50 कमांडो अपने साथी जवान ज्योति प्रकाश निराला के सपने को पूरा करने देश के कोने-कोने से उनके गांव पहुंचे थे. ज्योति प्रकाश निराला का सपना था कि उनकी बहन की शादी धूमधाम से हो…, और उनके साथी कमांडोज ने जो बहन को विदाई दी, उसे देख शादी में मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं. शशिकला को जब शादी के मंडप में पहुंचाने की घड़ी आई तो भाई की भूमिका निभाते हुए इन कमांडोज ने उसकी राह में अपनी हथेलियां बिछा दीं, ताकि बहन को उसके सगे भाई की कमी न महसूस हो.Also Read - आतंकी से सैनिक बनकर शहीद हुए नजीर अहमद वानी को सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार

उग्रवादियों के हमले में मारे गए ज्योति प्रकाश
भारतीय वायुसेना के गरुड़ कमांडो दस्ते में तैनात ज्योति प्रकाश निराला वर्ष 2017 में जम्मू-कश्मीर में एक आतंकी हमले में शहीद हो गए थे. कश्मीर के बांदीपुर में आतंकियों से भिड़ंत के दौरान 18 नवंबर 2017 को अपने साथी जवानों को बचाने के क्रम में ज्योति प्रकाश शहीद हो गए थे. भारत सरकार ने उनकी असाधारण वीरता को देखते हुए उन्हें शांति काल का सर्वोच्च सैनिक सम्मान अशोक चक्र देकर नवाजा था. उनकी मौत के बाद ज्योति प्रकाश की मां मालती देवी और पत्नी सुषमा ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों 26 जनवरी 2018 को ये सम्मान ग्रहण किया था. Also Read - Jyoti Prakash Nirala, a Garud Commando posthumously conferred the Ashok Chakra | गरुड़ कमांडो जेपी निराला को मरणोपरांत अशोक चक्र, कई आतंकियों को ढेर कर हुए थे शहीद

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घर के इकलौते बेटे थे ज्योति प्रकाश निराला
हमारी सहयोगी वेबसाइट डीएनए के अनुसार, वायुसेना के शहीद जवान ज्योति प्रकाश निराला अपने घर के इकलौते बेटे थे. साथ ही अपने परिवार में वे इकलौते कमाने वाले भी थे. बिहार के रोहतास जिले के रहने वाले ज्योति के शहीद होने के बाद परिवार को आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ा. ऐसे में जब बहन शशिकला की शादी की बात आई तो यह एक बड़ी चुनौती थी. लेकिन ऐन वक्त पर ज्योति प्रकाश निराला के रेजीमेंट के साथी शादी के समय पहुंचे और न सिर्फ बहन का विवाह समारोह संपन्न कराया, बल्कि 5 लाख रुपए की आर्थिक मदद भी की. यही वजह रही कि शशिकला की विदाई के बाद ज्योति प्रकाश के घरवालों की आंखें नम हो आईं. ज्योति के माता-पिता ने कहा- हमने एक बेटा खो दिया, लेकिन इसके बदले आज हमें 50 बेटे मिल गए. इन बेटों ने साबित कर दिया कि सैनिक के शहीद हो जाने के बाद भी उसका परिवार अकेला नहीं होता, बल्कि पूरा देश उसके साथ होता है.