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अगर हम आपसे कहेंगे की मंदिर में रात को जाने से आप पत्थर बनजाओगे तो शायद आप हमें पागल समझोगे मगर यह सच हैं, राजस्थान के बाड़मेर ज़िले में एक ऐसा ही मंदिर हैं जहा अगर आप रात के वक्त कदम रखोगे तो पत्थर बन जाएंगे। इस बात का रहस्य अभी तक खुल नहीं पाया हैं की आखिरकार ऐसा होता क्यों हैं।
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साइंस ने चाहे कितनी भी तरक्की करली हो मगर यह भी एक सत्य हैं की आज के इस ज़माने में भी लोग इस मंदिर में जाने से डरते हैं। कहते हैं की करीब नौ सौ साल पहले जब वहा परमार राजवंश के लोग राज किया करते थे, तभी वहा एक ग्यानी साधू रहने आये। उनके साथ उनके कई शिष्य भी आये।  कुछ दिन के बाद साधु देश भ्रमण पर निकले। निकलने से पहले उन्होंने स्थानिक लोगो को अपने साथियो की देखभाल करनेको कहा।

साधु महाराज के जाने के पश्चात उनके शिष्य बीमार पड़ने लगे।  एक कुम्हारिन को छोड़ किसी ने भी उनकी देखभाल नहीं की। कुछ दिन बाद जब महाराज वापस लौटे। उन्हें अपने शिष्यों का  बहुत ज़्यादा गुस्सा आया, उन्होंने कहा की जिस जगह पर इंसानियत नहीं वहा इंसान को भी नहीं होना चाहिए। उन्होंने सभी नगरवासियों को पत्थर बन जाने का श्राप दे दिया। जिस कुम्हारिन ने साधू के शिष्यों की सेवा की थी उसे बाबा ने शाम से  पहले वहा से चले जाने को कहा।  और उसे यह भी चेतावनी दी की वह पीछे मुड़कर ना देखे। कुम्हारी ने पीछे मुड़कर देखा और वह भी पत्थर बन गयी।

इस श्राप से लोग इतने डरे हुए हैं की नाही यहाँ कोई मरम्मत का काम होता हैं ना ही इस बात का पता लगाने कोई जाता हैं की वहा रात में इंसान पत्थर क्यों बनता हैं।