ब्रज की लट्ठमार होली न सिर्फ देश में बल्कि दुनिया में मशहूर है। देसी-विदेसी हर तरह के लोग ब्रज की गलियों में खेली जाने वाली इस अलग तरह की होली देखने के लिए पहुंचते हैं। इसकी शुरुआत ब्रज के बरसाना गाँव से हुई थी। इस दिन नंद गाँव के ग्वाल बाल होली खेलने के लिए राधा रानी के गाँव बरसाने जाते हैं और विभिन्न मंदिरों में पूजा अर्चना के पश्चात नंदगांव के पुरुष होली खेलने बरसाना गांव में आते हैं और बरसाना गांव के लोग नंदगांव में जाते हैं। इन्हें हुरियारे कहा जाता है।Also Read - होली के जश्न में डूब 'भाभी' को लगाया रंग, फिर 19 साल के लड़के के साथ हुआ चौंकाने वाला हादसा

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मान्यता है कि भगवान कृष्ण अपने सखाओं के साथ राधा और उनकी सखियों के साथ होली खेलने पहुंच जाते थे और उनके बीच खूब हंसी-ठिठोली होती थी। इस दौरान राधा और उनकी सखियां ग्वाल बालों पर डंडे बरसाया करती थीं। Also Read - Happy Holi 2021: क्रिकेट जगत पर चढ़ा होली का खुमार, Virender Sehwag ने इस तरह दी बधाई

ऐसे में लाठी-डंडों की मार से बचने के लिए ग्वाल वृंद भी ढ़ालों का प्रयोग किया करते थे जो धीरे-धीरे होली की परंपरा बन गई। मथुरा-व़ंदावन, नंदगांव और बरसाने में आज भी इस परंपरा का निर्वहन उसी रूप में किया जाता है और लठमार होली मनायी जाती है।

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आज भी इस दिन नाचते झूमते पुरुष गांव में पहुंचते हैं तो औरतें हाथ में ली हुई लाठियों से उन्हें पीटना शुरू कर देती हैं और वो खुद को बचाते भागते हैं। ये सब बहुत मस्तीभरा होता है। माना जाता है कि ऐसा करके भगवान कृष्ण के काल में उनके द्वारा की जाने वाली लीलाओं की पुनरावृत्ति की जा रही है।