नई दिल्ली: बचपन में निबंध (Essay) लिखना और लिखाना खूब होता है, लेकिन महाराष्ट्र के बीड ज़िले में कक्षा 4 में पढ़ने वाले बच्चे ने ऐसा कुछ लिखा जिसे पढ़कर टीचर के आंसू निकल आए. इसके बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुई बच्चे की बातों ने जिसने पढ़ा, वह भी भावुक हो गया. Also Read - India vs England ODI Series: भारत बनाम इंग्लैंड वनडे सीरीज में नहीं होंगे दर्शक, जानिए क्या है वजह

दरअसल, बीड ज़िले के वालकेवडी गांव में स्कूल है. स्कूल में मंगेश नाम का बच्चा कक्षा चार में पढ़ता है. स्कूल में बच्चे से टीचर ने निबंध लिखने को कहा. बच्चे ने निबंध लिखा, लेकिन उसने किसी अन्य विषय की बजाय अपने पिता की मौत और पिता के जाने के बाद की अपनी ज़िंदगी की स्थिति के बारे में ही लिखा डाला. बच्चे के पिता का कुछ दिन पहले ही टीबी की बीमारी के चलते निधन हुआ था.  बच्चा अपनी दिव्यांग मां के साथ रहता है. पिता घर के इकलौते कमाने वाले थे, ये सहारा छिन गया. Also Read - लड़की का पीछा करने पर कोर्ट ने 24 साल के युवक को 22 महीने की कड़ी सजा सुनाई

बच्चे और उसकी दिव्यांग मां को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. मंगेश ने निबंध (Essay on Father) में बताया कि दिव्यांग मां को मिलने वाली 600 रुपए की पेंशन से घर चलता है. मंगेश और उसके दिव्यांग मां मिलकर थोड़े से खेत में कुछ न कुछ फसल कर लेते हैं. बच्चे ने निबंध में इसी दर्द को बयान कर डाला, जो टीचर ने भी सोचा नहीं था. Also Read - Mukesh Ambani Family को नहीं मिली कोई धमकी भरी चिट्ठी, मुंबई पुलिस ने विस्‍फोटक से लदी स्‍कॉर्पियो के मालिक की पहचान की

क्लास की टीचर नज़मा शेख ने ये पढ़ा तो उनके आंसू निकल आए. उन्होंने बच्चे को दुलार किया और इसके बाद बच्चे का लिखा हुआ निबंध कई ग्रुप्स में व्हाट्स एप कर दिया. इसके बाद बच्चे का दर्द निबंध के रूप में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. कई लोग मंगेश की मदद को भी आगे आए हैं.

– मंगेश द्वारा मराठी में लिखे गए निबंध का हिंदी अनुवाद

‘मेरा नाम मंगेश परमेश्वर है. मेरे पापा का नाम परमेश्वर वालके था. मेरे पापा को टीवी की बीमारी हुई थी, इसलिए मेरी माँ ने मुझे मेरे मामा के गांव भेज दिया था. मेरे पापा की मौत हुई. मेरे पापा मजदूरी का काम करते थे. मेरे पापा मेरे लिए खाने की चीजें लाते थे. मेरे लिए कॉपी कलम लेकर आते थे. मुझे बहुत प्यार करते थे. मैं भी मेरे पापा को बहुत प्यार करता था. पर 18 दिसंबर को मेरे पापा मर गए, मेरी मां उस दिन बहुत रोईं.’

मंगेश ने आगे लिखा- ‘मैं भी उस दिन बहुत रोया. उस दिन मेरे घर पर बहुत मेहमान आए थे. मेरे पापा बहुत दयालु थे. मेरे पापा कहते थे कि तुम पढ़ लिखकर बड़े साहब बन जाना. पापा घर पर नहीं है तो कोई किसी भी तरह की मदद नहीं करता. मुझे मेरे पापा की बहुत याद आती है. मुझे और मेरी मां को रात के समय चोरों के आ जाने का डर लगता है. पापा तुम जल्दी वापस आ जाओ.’

बच्चे द्वारा मराठी में लिखा गया निबंध