कभी नहीं देखा होगा ऐसा क्रिकेट... धोती-कुर्ता पहनकर खेलते नजर आए खिलाड़ी, कमेंट्री सुन घूम जाएगा दिमाग । देखें Video

महार्षि मैत्री मैच क्रिकेट सीरीज-6 में युवा खिलाड़ी धोती-कुर्ता पहनकर खेल रहे हैं. सोशल मीडिया पर इसे जुड़ा वीडियो भी सामने आया, जिसमें संस्कृत भाषा में कमेंट्री भी सुनी गई. इस टूर्नामेंट में 27 टीमों ने हिस्सा लिया.

Published date india.com Published: January 6, 2026 11:37 PM IST
कभी नहीं देखा होगा ऐसा क्रिकेट... धोती-कुर्ता पहनकर खेलते नजर आए खिलाड़ी, कमेंट्री सुन घूम जाएगा दिमाग । देखें Video

भोपाल में हाल ही में एक अनोखी क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया. इस टूर्नामेंट की खासियत यह थी कि खिलाड़ी अपने पारंपरिक धोती-कुर्ता पहनकर खेल रहे थे, ना कि खेल-कूद वाली आम वर्दी में. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा गया कि प्रत्येक टीम के सदस्य अलग-अलग रंगों की कुर्ता में नजर आ रहे थे. यह प्रतियोगिता अंकर खेल परिसर में आयोजित की गई थी और इसमें भाग लेने वाले खिलाड़ियों का चयन विभिन्न वैदिक विश्वविद्यालयों और संस्कृत स्कूलों से हुआ था.

संस्कृत भाषा में हो रही थी कमेंट्री

इस टूर्नामेंट की एक और अनोखी बात यह थी कि खेल की कमेंट्री पूरी तरह संस्कृत भाषा में की जा रही थी, न कि हिंदी या अंग्रेजी में. आयोजकों का कहना है कि इसका उद्देश्य युवाओं में संस्कृत भाषा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देना है. यह टूर्नामेंट ‘महार्षि मैत्री मैच क्रिकेट सीरीज-6’ के नाम से जाना जाता है और अब तक यह छठी बार आयोजित किया जा रहा है. धीरे-धीरे यह प्रतियोगिता खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों में लोकप्रिय होती जा रही है.

टूर्नामेंट में 27 टीमों ने भाग लिया

इस टूर्नामेंट में कुल 27 टीमें भाग ले रही थीं, जो मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आई थीं. खिलाड़ियों में वैदिक विद्वान, संस्कृत छात्र और धार्मिक अनुष्ठानों के पुजारी शामिल थे. हालांकि, उन्होंने पारंपरिक कपड़े पहने थे, लेकिन इससे उनकी क्रिकेट खेल की दक्षता पर कोई असर नहीं पड़ा. वीडियो में साफ दिख रहा है कि खेल के दौरान खिलाड़ियों ने कुशल खेल कौशल दिखाए और मैदान पर जोरदार मुकाबला किया.

खेल के माध्यम से संस्कृत को बढ़ावा

पार्शुराम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पंडित विष्णु रजौरिया ने बताया कि इस टूर्नामेंट का मुख्य उद्देश्य युवाओं में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि पैदा करना है. उनका कहना है कि खेल एक ऐसा माध्यम है, जो भाषा और परंपरा से लोगों को जोड़ सकता है. यही वजह है कि खिलाड़ियों के लिए पारंपरिक कपड़े पहनना और संस्कृत में कमेंट्री करना एक अलग अनुभव और सीखने का अवसर बन गया है.

फाइनल मैच 9 जनवरी को खेला जाएगा

टूर्नामेंट का अंतिम मैच 9 जनवरी को खेला जाएगा और आयोजकों को उम्मीद है कि इस बार भी बड़ी संख्या में दर्शक मैच देखने आएंगे. धीरे-धीरे यह आयोजन मध्य प्रदेश में ही नहीं बल्कि देशभर में चर्चित होता जा रहा है. आयोजक चाहते हैं कि आने वाले वर्षों में इस तरह के टूर्नामेंट और अधिक युवा प्रतिभागियों को आकर्षित करें और खेल के माध्यम से भारतीय संस्कृति और भाषाओं को जीवित रखें.

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