
Gargi Santosh
गार्गी संतोष, जी मीडिया के India.com में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह हाइपरलोकल, नेशनल और वर्ल्ड सेक्शन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. गार्गी को लाइफस्टाइल, हेल्थ, टेक्नोलॉजी, और ... और पढ़ें
भोपाल में हाल ही में एक अनोखी क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया. इस टूर्नामेंट की खासियत यह थी कि खिलाड़ी अपने पारंपरिक धोती-कुर्ता पहनकर खेल रहे थे, ना कि खेल-कूद वाली आम वर्दी में. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा गया कि प्रत्येक टीम के सदस्य अलग-अलग रंगों की कुर्ता में नजर आ रहे थे. यह प्रतियोगिता अंकर खेल परिसर में आयोजित की गई थी और इसमें भाग लेने वाले खिलाड़ियों का चयन विभिन्न वैदिक विश्वविद्यालयों और संस्कृत स्कूलों से हुआ था.
इस टूर्नामेंट की एक और अनोखी बात यह थी कि खेल की कमेंट्री पूरी तरह संस्कृत भाषा में की जा रही थी, न कि हिंदी या अंग्रेजी में. आयोजकों का कहना है कि इसका उद्देश्य युवाओं में संस्कृत भाषा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देना है. यह टूर्नामेंट ‘महार्षि मैत्री मैच क्रिकेट सीरीज-6’ के नाम से जाना जाता है और अब तक यह छठी बार आयोजित किया जा रहा है. धीरे-धीरे यह प्रतियोगिता खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों में लोकप्रिय होती जा रही है.
VIDEO | In a unique blend of culture and sport, a cricket tournament is underway at Ankur Khel Parisar in Bhopal, Madhya Pradesh, where players compete in traditional dhoti-kurta attire instead of conventional cricket jerseys.
The participants, drawn from various Vedic… pic.twitter.com/jwXNbCBEPK
— Press Trust of India (@PTI_News) January 6, 2026
इस टूर्नामेंट में कुल 27 टीमें भाग ले रही थीं, जो मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आई थीं. खिलाड़ियों में वैदिक विद्वान, संस्कृत छात्र और धार्मिक अनुष्ठानों के पुजारी शामिल थे. हालांकि, उन्होंने पारंपरिक कपड़े पहने थे, लेकिन इससे उनकी क्रिकेट खेल की दक्षता पर कोई असर नहीं पड़ा. वीडियो में साफ दिख रहा है कि खेल के दौरान खिलाड़ियों ने कुशल खेल कौशल दिखाए और मैदान पर जोरदार मुकाबला किया.
पार्शुराम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पंडित विष्णु रजौरिया ने बताया कि इस टूर्नामेंट का मुख्य उद्देश्य युवाओं में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि पैदा करना है. उनका कहना है कि खेल एक ऐसा माध्यम है, जो भाषा और परंपरा से लोगों को जोड़ सकता है. यही वजह है कि खिलाड़ियों के लिए पारंपरिक कपड़े पहनना और संस्कृत में कमेंट्री करना एक अलग अनुभव और सीखने का अवसर बन गया है.
टूर्नामेंट का अंतिम मैच 9 जनवरी को खेला जाएगा और आयोजकों को उम्मीद है कि इस बार भी बड़ी संख्या में दर्शक मैच देखने आएंगे. धीरे-धीरे यह आयोजन मध्य प्रदेश में ही नहीं बल्कि देशभर में चर्चित होता जा रहा है. आयोजक चाहते हैं कि आने वाले वर्षों में इस तरह के टूर्नामेंट और अधिक युवा प्रतिभागियों को आकर्षित करें और खेल के माध्यम से भारतीय संस्कृति और भाषाओं को जीवित रखें.
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