नई दिल्ली: प्रगतिशील भारत को विकासोन्मुख करने की दिशा में डिजिटल खिलाड़ियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है. केंद्र की सरकार ने भी डिजिटल इंडिया पर सर्वाधिक बल दिया और वर्तमान में युवाओं की भागीदारी ने इसमें अग्रणी भूमिका निभाई है. डिजिटल दुनिया के अंतर्गत वेब डेवलपमेंट, SEO, सोशल मीडिया मैनेजमेंट और डिजिटल मार्केटिंग ने अपनी जगह बनाई ही है लेकिन इसको स्थापित करने में ग्राफिक डिजाइन का ही पूरा करामात है. बेहतर ग्राफिक ना केवल लोगों को डिजिटल प्लेटफार्म की ओर आकर्षित करते हैं साथ ही वो डिजिटल कंटेंट की रिच भी बढ़ाते हैं.Also Read - Motivational Story: पिता, पति और भाई को खोया, फिर भी हौसला रहा बुलंद, अब इस परीक्षा में किया टॉप

इसी क्रम में एक युवा दीपक गोयल ने ग्राफिक के क्षेत्र में अलग ही मिसाल कायम की है. दीपक उस समय के छात्र रहे हैं जहां इंजीनियरिंग को छात्रों का एक मात्र उद्देश्य माना जाता था और पारिवारिक तथा सामाजिक दबाव और लोकप्रचलन के कारण इंजीनियरिंग चुनना छात्रों की मजबूरी होती थी. वैसे समय में दीपक ने इंजीनियरिंग में एडमिशन तो ले लिया लेकिन पहले वर्ष ही पांच में से तीन विषयों में फेल होने के कारण उनको समझ में आया कि वे इंजीनियरिंग के लिए नहीं बने हैं. हालांकि दीपक का फेल होना ही उनके जीवन में सफलता की पहली सीढ़ी रही. दीपक गोयल की इसी असफलता ने उनको DesignGiri India का संस्थापक बना दिया. Also Read - Tokyo Olympics 2020: कक्षा 8वीं की किताब ने देश के दिया मीराबाई चानू, कभी जलावन के लिए बटोरती थीं लकड़ियां

दीपक गोयल बताते हैं कि इस असफलता के बाद उन्होंने हार नहीं मानी. जब उन्होंने अपने परिवार में बताया कि वे तीन विषयों में फेल हो चुके हैं और आगे इंजीनियरिंग छोड़ कर कुछ नया शुरू करना चाहते हैं उस स्थिति में परिवार ने उनका साथ दिया और उन्हें ग्राफिक के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए नया लैपटॉप दिया. इसके बाद दीपक ने ग्राफिक में डिप्लोमा किया और सबसे बड़ी बात रही कि उन्होंने ग्राफिक के हर असेसमेंट में A ग्रेड प्राप्त किया. Also Read - कभी खेतों में करती थीं मजदूरी, आज अमेरिकी कंपनी की सीईओ, लग्‍जरी गाड़ि‍यों का कलेक्‍शन रखती हैं

डिज़ाइनगिरी इंडिया के संस्थापक दीपक गोयल का कहना है कि इंजीनियरिंग में फेल होने के बाद मुझे कभी उम्मीद नहीं थी कि मैं कुछ कर पाऊंगा लेकिन पहले फ्रीलांस, फिर वर्क फ्रॉम होम करते करते मैंने डिज़ाइनगिरी इंडिया को सबके सहयोग से खड़ा किया. डिज़ाइनगिरी इंडिया मात्र एक सोशल मीडिया का पेज था लेकिन परिवार के लोगों और दोस्तों ने जिस प्रकार इसे पसंद किया मुझे लगा कि मैं इस पर कुछ और कर सकता हूं और अंत मे इसे एक कंपनी का रूप देने में सफलता मिली.

दीपक बस यहीं नहीं रुके. दीपक का उद्देश्य लोगों को रोजगार देना और उन्हें और भी प्रशिक्षित करना था. इस उद्देश्य से उन्होंने एक सैलून की भी शुरुआत की जहां लोगों को रोजगार मिले साथ ही उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिल कर जरूरतमंदों की सेवा के लिए एक एनजीओ भी स्थापित किया.

दीपक बताते हैं कि आज design giri India देश के 300 से अधिक और विदेशों की 50 कंपनियों के साथ कार्य कर चुकी है. हम लोगों को डिजिटल सेवाएं दे रहे हैं, और वेब डेवलपमेंट से लेकर डिजिटल ब्रांडिंग तक की सेवाएं कम समय और उचित दर पर प्रदान कर रहे हैं. हमारी कोशिश है कि हम जल्द ही और लोगों को रोजगार के अवसर दें जिससे सामाजिक या प्रचलन के दबाव में अपनी शिक्षा नहीं पूरी कर पाने वाले छात्र भी खुद को मजबूत बना सके. दीपक उन छात्रों के लिए प्रेरणा हैं जो अपने शौक के अनुसार जीवन में कुछ करने के साथ समाज को भी कुछ योगदान देना चाहते हैं.