
Satyam Kumar
सत्यम, बिहार से हैं. उन्होंने LS College, मुजफ्फरपुर, बिहार से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया से MA In Media Governance में मास्टर्स किया है. मास्टर्स के साथ ... और पढ़ें
प्रकृति अक्सर हमें ऐसे दृश्यों से रूबरू कराती है जो हमारी कल्पना से परे होते हैं. आग और बर्फ, जिन्हें एक-दूसरे का कट्टर दुश्मन माना जाता है, जब एक साथ मिल जाएं तो वह नजारा किसी करिश्मे से कम नहीं लगता. इटली के माउंट एटना (Mount Etna) से आई ताजा तस्वीरों ने दुनिया को हैरान कर दिया है, जहां सफेद बर्फ की चादर के बीच नारंगी रंग की आग की लहरें दौड़ती नजर आ रही हैं.
यूरोप के सबसे सक्रिय और खतरनाक ज्वालामुखियों में शुमार माउंट एटना ने एक बार फिर अपनी ताकत का अहसास कराया है. इटली के सिसली द्वीप पर स्थित इस पहाड़ पर जब ज्वालामुखी फटा, तो आसमान में सैकड़ों फीट ऊपर तक लावा उछला. इसके बाद जो हुआ, वह कुदरत का अनोखा मेल था. पहाड़ों पर जमी ताजा सफेद बर्फ के ऊपर खौलता हुआ लाल लावा बहने लगा. आग और बर्फ के इस मिलन ने ऐसा दृश्य पैदा किया जैसे बर्फ खुद जल रही हो.
INSOLITE – Le volcan Etna, réactivé, a vu sa lave s’écouler sur la neige présente à son sommet, offrant un phénomène visuel de coexistence entre l’activité volcanique et les conditions hivernales. pic.twitter.com/CnAzx5EVFk
— Mediavrai (@MediavraiFR) January 6, 2026
माउंट एटना का यह ताजा विस्फोट नए साल 2026 के पहले दिन यानी 1 जनवरी को हुआ. हालांकि, इसकी हलचल 2025 के आखिरी दिनों से ही शुरू हो गई थी. इटली के नेशनल जियोलॉजी और ज्वालामुखी विज्ञान संस्थान (INGV) ने पहले ही अलर्ट जारी कर दिया था कि ज्वालामुखी के पूर्वी ढलान की दरारों से लावा बाहर निकल सकता है. चेतावनी के मुताबिक, चोटियों के आसपास के गड्ढों में लगातार विस्फोट हुए और देखते ही देखते आसमान राख के काले बादलों से ढंक गया.
ज्वालामुखी फटने के दौरान वहां मौजूद सैलानियों ने इस रोमांचक पल को अपने कैमरों में कैद किया. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे चमकते हुए नारंगी अंगारे बर्फ की ढलानों को झुलसा रहे हैं. लावा इतना गर्म है कि बर्फ पल भर में पिघलकर वाष्प बन रही है.
भले ही यह नजारा देखने में चमत्कारिक लग रहा हो, लेकिन यह उतना ही खतरनाक भी है. माउंट एटना दुनिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है. वैज्ञानिकों के अनुसार, लावा का स्तर बढ़ने के बावजूद यह अभी बहुत बड़े रिहायशी इलाके तक नहीं फैला है, लेकिन राख के गुबार और जहरीली गैसों के कारण स्थानीय प्रशासन ने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने पर पाबंदी लगा दी है.
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