6 किमी के लिए 415 रुपये! भारत के इस शहर में कैब का किराया सुन चौंके इंटरनेट यूजर्स, पोस्ट वायरल

Viral News: बुधवार की सुबह टैक्सी के अत्यधिक किराये और अनुपलब्धता को लेकर एक यात्री की हताशा वाली पोस्ट वायरल हो गई है. जानिए ये मामला किस शहर का है.

Published date india.com Updated: August 6, 2025 1:14 PM IST
email india.com By Anil email india.com twitter india.com | Edited by Anil email india.com twitter india.com
6 किमी के लिए 415 रुपये! भारत के इस शहर में कैब का किराया सुन चौंके इंटरनेट यूजर्स, पोस्ट वायरल

बेंगलुरु में एक शख्स की सुबह के समय एक रेडिट पोस्ट सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है. इसकी वजह है, टैक्सी का महंगा किराया और कैब आसानी से न मिलना. ये हालात देखकर लोग उस शख्स के लिए बुरा महसूस कर रहे हैं, स्पेशली वो लोग जो शहर में हफ्ते के बीच में ऑफिस जाने की इस भागदौड़ से परेशान रहते हैं.

इस पोस्ट का टाइटल है, क्या बुधवार आधिकारिक तौर पर वह दिन है जिस दिन आप ऑफिस से काम करने से बचते हैं? बस फिर क्या था, इसी सवाल को लेकर लोगों के बीच बहस छिड़ गई कि क्या बेंगलुरु में बुधवार अब सबसे टेंशन वाला दिन बन चुका है?

वायरल पोस्ट में क्या है?

वायरल पोस्ट में, एक पैसेंजर ने बताया कि कैसे बुधवार की सुबह उसे एक टैक्सी बुक करने के लिए एक घंटे से अधिक समय तक मशक्कत करनी पड़ी. कोई भी कैब सवारी एक्सेप्ट ही नहीं कर रही थी और सर्ज प्राइसिंग के कारण केवल 6 किलोमीटर की सवारी के लिए किराया 415 रुपये तक पहुंच गया. पैसेंजर ने लिखा है कि मुझे पता है कि इस सारे झंझट से बचने के लिए घर से कब निकलना है और मैं अपने ब्रैकेट के अंदर ही हूं, यूजर ने अफसोस जताया. अब क्या? क्या मुझे 7 बजे निकलना चाहिए? फिर धीरे-धीरे 6 बजे?

इसके अलावा यूजर ने आगे लिखा कि ऑटो, नॉन-एसी और एसी कैब, सब एक ही रेट वसूल रहे हैं, फिर भी राइड नहीं ले रहे, ये लोग क्या चाहते हैं? सोने का एक बड़ा बर्तन?’ पोस्ट के आखिर में उन्होंने लिखा कि आमतौर पर 6 किमी की दूरी तय करने में 20 मिनट लगते हैं, लेकिन देखते हैं आज क्या होता है.

रेडिट यूजर का गजब का रिएक्शन

पोस्ट वायरल होने के बाद यूजर्स के कमेंट्स आना शुरू हो गए. कई यूजर्स ने अपनी निराशा जताई और किसी ने कहा बुधवार की सुबह ट्रैवल करते टाइम उन्हें कैसे अजीबोगरीब हालात का सामना करना पड़ा. एक यूजर ने लिखा, ‘आज सुबह सड़कें सचमुच पागल हो गई हैं. मैं सुबह 6:40 बजे बाहर निकला, तब भी ऐसा लग रहा था जैसे भीड़भाड़ वाले समय में पागलपन हो. इसमें कुछ हद तक गायों का भी हाथ है. इतनी सारी गायें हैं और वे हिलती ही नहीं, हॉर्न बजाने का भी कोई मतलब नहीं.’

वहीं एक यूजर सर्ज प्राइसिंग को लेकर सुझाव देते हुए लिखता है कि ऐप देखता है कि किसी जगह से कितनी बार राइड बुक करने की कोशिश हो रही है. आप जितनी बार ट्राय करेंगे, प्राइस उतना ही बढ़ता जाता है. मैंने एक जुगाड़ निकाला है, पहले बुकिंग की कोशिश करो, जब टाइम आउट हो जाए तब दोबारा सर्च मारो. कई बार इससे रेट कम हो जाता है.

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इसके साथ ही कुछ रेडिट यूजर्स ने ये भी बताया कि शायद बस हड़ताल की वजह से ही ऐसी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. लोग मजबूरी में कैब ऐप्स का सहारा ले रहे हैं, और इसी के चलते किराया भी बढ़ रहा है.

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