नई दिल्ली: एथिकल हैकिंग कोई नई अवधारणा नहीं है. भारत ने अतीत में ऐसे लोगों की एक नस्ल देखी है. मगर अतीत और आज में फर्क है तो बस पैसे का. आज के दौर में व्यवसायों और कंपनियों पर साइबर हमले की घटना देखने को मिलती रहती है. डिजिटल होती इस दुनिया में पहले के मुताबिक इस हमले की संख्या बढ़ भी गई है. इन सब हमलों के निवारण में अपना समय बिताता उत्तर भारत का एक लड़का आज एथिकल हैकिंग की दुनिया में एक बड़ा नाम बन गया है.
23 वर्षीय शिवम वशिष्ठ (Shivam Vashist), सैन फ्रांसिस्को स्थित हैकरवन कंपनी से जुड़े एक हैकर हैं जो बड़ी बड़ी कंपनियों के लिए काम करते हैं. इसमें स्टारबक्स, इंस्टाग्राम, गोल्डमैन सैक्स, ट्विटर, जोमैटो और वनप्लस जैसी कंपनियां शामिल है. शिवम वशिष्ठ का करियर ही हैकिंग है और वो कथित तौर पर बग ढूंढकर एक साल में $ 125,000 (लगभग 88.94 लाख रूपए) से अधिक कमाते हैं.
शिवम ने इन पैसों से अपनेर घरवालों को दुनिया भर का सैर कराया है और अब वो अपने भाई को भी हैकिंग की इस विधि से परिचय करवा रहे हैं. शिवम ने बताया कि वो एक सप्ताह में लगभग 15 घंटे हैकिंग में बिताता है. आपको यह जानकार हैरानी होगी कि हैकर द्वारा संचालित सुरक्षा कार्यक्रमों की संख्या में साल दर साल 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
शिवम ने 19 साल की उम्र मेंकंप्यूटर और एथिकल हैकिंग की दुनिया के बारे में जानना शुरू कर दिया था. उनके इस जूनून के बारे में जब घरवालों को पता चला तब वो बहुत चिंतित हुए मगर बाद में शिवम की उपलब्धि ने उन्हें सब कुछ समझा दिया. शिवम ने 20 साल की उम्र में इंस्टाकार्ट से अपनी पहली कमाई की थी.
अगस्त में, HackerOne ने खुलासा किया कि हैकर्स ने एक वर्ष में विभिन्न बग बाउंटी अवसरों के माध्यम से $ 21 मिलियन (लगभग 149.42 करोड़ रूपए) कमाए क्योंकि मैलवेयर को ठीक करने के लिए सरकारों के प्रयासों ने वैश्विक स्तर पर 214 प्रतिशत की वृद्धि की है. फूड डिलीवरी प्लेटफ़ॉर्म जोमैटो ने 435 से अधिक हैकरों को अपने प्लेटफ़ॉर्म पर बग ढूंढने और ठीक करने के लिए 435 से अधिक डॉलर का भुगतान किया है.
वनप्लस ने इस हफ्ते घोषणा की कि उसने एक सुरक्षा प्रतिक्रिया केंद्र की स्थापना की है जो सुरक्षा विशेषज्ञों को बग बाउंटी की पेशकश करेगा. क्वालीफाइंग बग रिपोर्ट के लिए पुरस्कार $ 50- $ 7,000 रेंज में होंगे. शिवम के अनुसार, भारत डिजिटल पथ पर है, लेकिन कंप्यूटर सुरक्षा पर यहां पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता है और हमारे सिस्टम में बहुत सारी कमजोरियां हैं जो अनियंत्रित हैं.
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