Survey Of 54 Percent Of Singles Says There No Problem If Partner Forms An Emotional Bond With Ai
'अगर पार्टनर AI से इमोशनल बॉन्ड बनाए तो कोई दिक्कत नहीं...', 54% सिंगल्स पर हुए सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा
एक नए सर्वे से पता चला है कि लोग इस बात को नॉर्मल मान रहे हैं कि चैटबॉट डेटिंग की दुनिया में इमोशनल सहारा बन सकते हैं. 54% सिंगल्स इस बात से कोई एतराज नहीं करते हैं.
Study on AI Connection: डेटिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब कोई दूर की बात नहीं रही. दुनिया भर के लोग इसका इस्तेमाल असल, पर्सनल तरीकों से कर रहे हैं, फ्लर्ट करने, कनेक्ट करने, पार्टनर से मिलने और यहां तक कि इमोशनल सपोर्ट पाने के लिए भी. चाहे आप इसे पसंद करें या नापसंद, AI चुपचाप मॉडर्न रिश्तों का हिस्सा बन गया है.
दिलचस्प बात ये है कि हैपन (डेटिंग ऐप) की हालिया डेटिंग ट्रेंड रिपोर्ट में एक बढ़ते बदलाव पर जोर दिया गया है जिसे ‘AI सिचुएशनशिप AI इमोशनल साइडकिक के तौर पर, रिप्लेसमेंट नहीं’ कहा गया है. इसका मतलब ये नहीं है कि AI आपका क्रश चुरा रहा है, बल्कि यह है कि यह चुपचाप लोगों को खुद को बेहतर ढंग से सोचने, समझने और कंट्रोल करने में मदद कर रहा है.
डिजिटल कनेक्शन तेजी से नॉर्मल
रिपोर्ट से पता चलता है कि 54 परसेंट सिंगल्स को इस बात से कोई दिक्कत नहीं होगी कि उनका क्रश किसी AI के साथ इमोशनल बॉन्ड बनाए, जो दिखाता है कि डिजिटल साथ कितनी तेजी से नॉर्मल हो रहा है. साथ ही, 41 परसेंट लोग मानते हैं कि इससे उन्हें बेचैनी होती है, जो इस बात की याद दिलाता है कि भले ही एल्गोरिदम गाइड कर सकते हैं, शांत कर सकते हैं और सुझाव दे सकते हैं, लेकिन असली केमिस्ट्री अभी भी इंसानों के पास है.
जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी ज्यादा कनेक्शन बना रही है, कई यूजर्स असल में साथ, थेरेपी और यहां तक कि रोमांटिक बातचीत के लिए AI-ड्रिवन चैटबॉट के साथ जुड़ रहे हैं. भारत का डेटिंग मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें आज के जमाने के डेटर्स ऑनलाइन डेटिंग की दुनिया में खुद को और ज्यादा लगा रहे हैं और Gen Z इसमें सबसे आगे है. इस साल की शुरुआत में, Joi AI नाम के एक चैटबॉट ऐप के एक सर्वे से पता चला कि 83 प्रतिशत Gen Z का मानना है कि वे AI के साथ एक गहरा इमोशनल रिश्ता बना सकते हैं.
AI सिचुएशनशिप्स क्यों बढ़ रही हैं?
जब हम किसी भी चीज़ के इमोशनल साइड की बात करते हैं, तो यह कुछ नरम, दिल को छूने वाला, धीमा और कुछ ऐसा होता है जिसकी हर इंसान को चाहत होती है. चाहे वह इमोशनल इंटेलिजेंस हो या आपके पार्टनर की इमोशनल अवेलेबिलिटी, इमोशनल अपील का महत्व होता है, खासकर रिलेशनशिप में और AI ने इस डिपार्टमेंट में भी अपनी पकड़ बना ली है.
यह समझना भी मुश्किल नहीं है कि मशीनें रोमांटिक आउटलेट कैसे बन गई हैं. इंडिया टुडे मैगजीन की सोनाली आचार्य से पहले बात करते हुए, मुंबई के रिलेशनशिप कोच प्रतीक जैन ने बताया कि रोमांटिक कनेक्शन ढूंढने में इंसानों की निराशा, थकान और थकावट कैसे लोगों को इन AI मॉडल्स के साथ किसी तरह का सुकून ढूंढने पर मजबूर कर रही है.
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