
Rishabh Kumar
ऋषभ कुमार पाण्डेय डिजिटल मीडिया और खबरों की दुनिया में एक साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं. ऋषभ राजनीति, राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय घटनाओं और Off-Beat से जुड़ी खबरों में ... और पढ़ें
Viral News: तेलंगाना के विकाराबाद जिले में एक अनोखी और सराहनीय पहल सामने आई है. यहां एक पत्थर की खदान में काम करने वाले कर्मचारियों ने एक महीने के लिए माइनिंग रोक दी है. वजह ये थी की यहां खदान में एक दुर्लभ रॉक चील उल्लू ने अपने अंडे दिए हैं. वन्यजीव फोटोग्राफरों और संरक्षणवादियों ने जब इस पक्षी की मौजूदगी के बारे में वन विभाग को जानकारी दी. तो तुरंत महीने भर के लिए काम रोक दिया गया.
विकाराबाद के जिला वन अधिकारी ज्ञानेश्वर ने बताया कि वन्यजीव फोटोग्राफर मनोज कुमार विट्टापु ने तेलंगाना के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) सी सुवर्णा को रॉक चील उल्लू और उसके पांच अंडों के बारे में सूचित किया. विट्टापु ने छह दिन पहले येनकथला के घास के मैदान का दौरा किया था, जहां उन्होंने इस दुर्लभ दृश्य को देखा. इसके बाद PCCF ने विकाराबाद के वन अधिकारियों को तुरंत मौके पर जाकर सुरक्षा के निर्देश दिए. वन विभाग के कर्मचारी वहां पहुंचे और खदान मालिक लक्ष्मण रेड्डी को पूरी जानकारी दी.
वन अधिकारियों ने जैसे ही यह जानकारी दी, खदान के मालिक ने तुरंत खदान का काम बंद करने का फैसला लिया. उन्होंने कहा कि जब तक चूजे उड़ने लायक नहीं हो जाते, तब तक वहां किसी भी तरह की गतिविधि नहीं होगी. वन विभाग के अधिकारी रोज मौके पर जाकर स्थिति पर नजर रख रहे हैं. बताया जाता है कि यह रॉक चील उल्लू दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाने वाला दुर्लभ पक्षी है. यह चट्टानी जगहों पर रहना पसंद करता है और कीड़े, चूहे जैसे छोटे जीवों का शिकार करता है. हालांकि यह प्रजाति लुप्तप्राय नहीं है, लेकिन इसे देखना बहुत कम होता है.
अधिकारियों का कहना है कि यह पता नहीं चल पाया कि उल्लू ने अंडे कब दिए, लेकिन उम्मीद है कि अगले 15 दिनों में चूजे बाहर आ जाएंगे. यदि इन्हें 20–25 दिनों तक पूरी सुरक्षा मिले, तो चूजे उड़ने भी लगेंगे. फोटोग्राफर विट्टापु ने कहा कि वे वहां बिल्कुल सही समय पर पहुँचे, क्योंकि उस समय खनन का काम चल रहा था. अगर खदान चलती रहती, तो अंडे टूट सकते थे. वहां के लोगों को भी अंडों की जानकारी नहीं थी, इसलिए समय पर दी गई सूचना से इन पक्षियों की जान बच गई.
रॉक चील उल्लू और उसके अंडों की सुरक्षा के लिए WWF (वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर) और स्थानीय पशु कार्यकर्ताओं ने वन विभाग से संपर्क किया. WWF एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण में काम करती है. खदान के मालिक ने भी पूर्ण सहयोग दिखाते हुए वहाँ का काम रोक दिया. वन विभाग, संरक्षणवादियों और स्थानीय लोगों के संयुक्त प्रयास से अब इस दुर्लभ पक्षी के अंडों को सुरक्षित माहौल मिल रहा है.
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