Viral Photo: उत्तरप्रदेश के हाथरस में एक दलित लड़की के साथ जो दरिंदगी हुई, उससे पूरा देश गुस्से में है. हालांकि उसकी मेडिकल रिपोर्ट पर पुलिस का कहना है कि उसके साथ गैंगरेप की घटना नहीं हुई थी. उसकी मौत गले की हड्डी टूटने से हुई थी. इसके साथ ही एक बड़ी बात भी सामने आई है वो है कि सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल हो रही है, जिसमें बताया गया है कि यह गैंगरेप पीड़ित लड़की है. लेकिन असल में जो फोटो दिखाई गई है, वह लड़की चंडीगढ़ की मनीषा है. Also Read - BJP सांसद वरुण गांधी ने शराब तस्कर को कहा- तुम्हारे बाप का नौकर नहीं हूं, ऑडियो वायरल

जानिए कौन है मनीषा यादव, जिसकी तस्वीर हो रही वायरल Also Read - UP News: जमीन हड़पने की साजिश के तहत पुजारी ने ही खुद पर चलवाई थी गोली, पुलिस ने 7 को किया गिरफ्तार

मनीषा यादव, जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है उसकी दो साल पहले बीमारी के कारण मौत हो गई थी. अब उसकी तस्वीर को हाथरस पीड़िता की तस्वीर बताकर वायरल किया जा रहा है और उसके लिए न्याय की मांग की जा रही है. अनजाने में वायरल हो रही इस तस्वीर के मनीषा के परिजन दुखी हैं. सोशल मीडिया पर आम पब्लिक ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े सेलिब्रिटी भी चंडीगढ़ की मनीषा की तस्वीर को वायरल करने में लगे हुए हैं. Also Read - उत्तरप्रदेश के एक IPS ने एक दिन में कमा लिए एक मिलियन डॉलर, फेसबुक पर बताया कैसे..

दुखी पिता ने कही ये बात 

देश भर में वायरल हो रही मनीषा की तस्वीर की वजह से उसके पिता के जख्म फिर ताजा हो गए हैं, जो अपनी जवान बेटी के चले जाने का गम भुलाने की कोशिश कर रहे थे. मनीषा के नाम में हैशटैग के साथ कई ट्रेंड्स चल रहे हैं, जिसे देखकर उसके पिता का कहना है कि बेवजह आज फिर बेटी की यादें शूल की तरह चुभ रही हैं.

मनीषा के पिता मोहन लाल यादव ने बताया कि उन्हें बेहद दुख हो रहा है कि उनकी बेटी की मौत के बाद उसकी इस तरह से बदनामी की जा रही है. मोहन लाल ने बुधवार को चंडीगढ़ के एसएसपी को इस संबंध में शिकायत भी दी है और कहा है कि सोशल मीडिया पर उनकी बेटी की तस्वीरें वायरल होने से रोका जाए. अगर कोई ऐसा कर रहा है तो उन पर कार्रवाई की जाए.

मनीषा यादव का परिवार रामदरबार काॅलोनी में रहता है. मनीषा की 21 जून 2018 को शादी हुई थी. उसे पथरी की बीमारी थी और दिनों दिन ये बीमारी बढ़ती गई. 22 जुलाई 2018 को मनीषा की मौत हो गई.

किसी की तस्वीर इस तरह वायरल करना अपराध है

एडवोकेट अनिल गोगना ने बताया कि रेप पीड़ित के बारे में किसी भी तरह की जानकारी को सार्वजनिक करना दंडनीय अपराध है. ऐसा करने वालों पर आईपीसी की धारा 228(ए) के तहत कार्रवाई हो सकती है. इस धारा के तहत दोषियों को दो साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है. पुलिस से मामले की जांच की मांग की जाएगी.