
Nandan Singh
नंदन सिंह ने पत्रकारिता में करियर की शुरुआत साल 2015 में ईनाडु डिजिटल यानी ईटीवी (हैदराबाद) से की. यहां इन्होंने बतौर कॉपी राइटर करीब 10 महीनों तक काम किया. सीखने ... और पढ़ें
Viral Video Today: अंतरिक्ष की दुनिया जितनी रोमांचक है, उतनी ही रहस्यमयी भी है. पृथ्वी पर जिन चीजों को हम सामान्य मानते हैं, वे स्पेस में बिल्कुल अलग तरीके से काम करती हैं. खासकर पानी का व्यवहार अंतरिक्ष में काफी बदल जाता है, जो वैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय है. भारतीय एस्ट्रोनॉट और एयरफोर्स ऑफिसर शुभांशु शुक्ला ने आसान भाषा में बताया कि माइक्रोग्रैविटी यानी बेहद कम गुरुत्वाकर्षण के कारण अंतरिक्ष में पानी और अन्य वस्तुओं का व्यवहार पृथ्वी से अलग हो जाता है. उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में वैज्ञानिक प्रयोग करना उनके लिए बेहद रोचक अनुभव रहा है. वहां कई ऐसी चीजें, जिन्हें हम रोजमर्रा की जिंदगी में सामान्य रूप से देखते हैं, स्पेस में बिल्कुल नए और अनोखे तरीके से दिखाई देती हैं.
शुभांशु शुक्ला ने कहा कि पृथ्वी और अंतरिक्ष के बीच सबसे बड़ा अंतर गुरुत्वाकर्षण यानी ग्रैविटी का होता है. पृथ्वी पर तरल पदार्थ हमेशा नीचे की ओर रहते हैं, लेकिन अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी के कारण उनका व्यवहार पूरी तरह बदल जाता है. यही कारण है कि वैज्ञानिक अंतरिक्ष में तरल पदार्थों पर विशेष अध्ययन करते हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पृथ्वी पर किसी फ्यूल टैंक में ईंधन नीचे की तरफ जमा रहता है, लेकिन अंतरिक्ष में ऐसा नहीं होता. वहां फ्यूल अपनी जगह पर स्थिर नहीं रहता और थोड़े से धक्के या गति के प्रभाव से टैंक के किसी भी हिस्से में पहुंच सकता है. ऐसे में जब अंतरिक्ष यान के इंजन को दोबारा शुरू करना होता है, तब ईंधन का सही स्थान पर होना बेहद जरूरी होता है. इसी वजह से अंतरिक्ष यानों के फ्यूल टैंक डिजाइन करना एक बड़ी चुनौती माना जाता है.
शुभांशु ने एक वीडियो के माध्यम से पानी के व्यवहार का प्रदर्शन भी किया. उन्होंने बताया कि माइक्रोग्रैविटी में पानी नीचे गिरने के बजाय हवा में तैरते हुए एक गोलाकार बुलबुले का रूप ले लेता है. पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण पानी को नीचे खींचता है, लेकिन अंतरिक्ष में यह प्रभाव लगभग नहीं होता, इसलिए पानी एक स्थिर गोले की तरह दिखाई देता है.प्रयोग के दौरान उन्होंने पानी के इस बुलबुले को धीरे-धीरे घुमाकर दिखाया और बताया कि वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश करते हैं कि घूमने वाली ताकतों का तरल पदार्थों पर क्या प्रभाव पड़ता है. इस तरह के अध्ययन से अंतरिक्ष में फ्लूइड डायनामिक्स को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है.
उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में तरल पदार्थों के व्यवहार को समझना भविष्य के लंबे अंतरिक्ष अभियानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इससे फ्यूल स्टोरेज, फ्लूइड मैनेजमेंट और अन्य जरूरी सिस्टम को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाया जा सकता है. (इनपुट: आईएएनएस)
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