What Is Chillai Kalan: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में ‘चिल्लई कलां’ की शुरआत हो चुकी है. 40 दिन के इस समय में क्या होता है, क्यों इन दिनों में खाने-पीने का विशेष ध्यान रखा जाता है. जानें इसके बारे में सब कुछ. Also Read - आखिर किस वजह से जम्मू-कश्मीर के कैदियों को आगरा जेल स्थानांतरित किया गया, जानें पूरी डिटेल्स

क्या है चिल्लई कलां
कड़ाके की ठंड, सूर्य बादलों में छुपा, ठंडी हवाएं, पेड़ों पर बर्फ…यही है चिल्लई कलां. इस एक महीने के समय में रात के तापमान में काफी गिरावट रहती है. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के क्षेत्र में ये स्थिति होती है. यहां अधिकतम तापमान 6-7 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है. घाटी में भीषण ठंड के कारण, डल झील, वुलर झील समेत कई अन्य जलाशय जम जाते हैं. Also Read - केंद्र सरकार ने सिविल सर्विसेज का जम्मू-कश्मीर कैडर किया खत्म, अधिसूचना जारी कर AGMUT में किया विलय

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क्या कहते हैं वैज्ञानिक
पारिस्थितिकी और पर्यावरण से जुड़े वैज्ञानिकों के लिए चिल्लई कलां एक अच्छी और जरूरी अवधि होती है क्योंकि इस अवधि में गिरी बर्फ से ही घाटी और लद्दाख को बारहमासी जलाशयों से पानी मिलता है. गर्मी के महीनों में नदियों, झरनों और झीलों का प्रवाह इस बात पर निर्भर करता है कि इन 40 दिनों की लंबी अवधि में कितनी भारी बर्फबारी हुई है.

क्या खाते हैं लोग
40-दिन की इस हड्डियां कंपा देने वाली चिल्लई कलां की ठंड के दौरान जिंदा रहने के लिए कश्मीरी उच्च कैलोरी वाली चीजें खाते हैं, जिसमें ‘हरीसा’ भी शामिल है. इसे रात के समय आग जलाकर बड़े पात्र में मटन और मसालों से पकाया जाता है.

अभी क्या हालात हैं
अभी श्रीनगर में तापमान -4, पहलगाम में -4.6 और गुलमर्ग में -6.4 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह रहा है. वहीं लद्दाख के लेह में -14.6, कारगिल में -20 और द्रास में -20.5 तापमान रिकॉर्ड किया जा रहा है. जम्मू शहर में 5.8 डिग्री, कटरा में 7, बटोटे में 3.3, बेनिहाल में 1 और भद्रवाह में -1.2 न्यूनतम तापमान है.
(एजेंसी से इनपुट)