सबसे पहले किसने बनवाया था सोमनाथ मंदिर? हैरान कर देगी इसके बनने की कहानी

Somnath Swabhiman Parv: सोमनाथ मंदिर को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है, जिसका निर्माण पौराणिक कथाओं के अनुसार स्वयं चंद्रदेव ने किया था. विदेशी आक्रांताओं द्वारा कई बार नष्ट किए जाने के बाद, वर्तमान भव्य मंदिर का निर्माण सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से हुआ.

Published date india.com Published: January 9, 2026 6:44 PM IST
Somnath Temple
सोमनाथ मंदिर के बनने की कहानी

Somnath Swabhiman Parv: गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह पर स्थित सोमनाथ मंदिर भारतीय इतिहास, संस्कृति और अटूट आस्था का जीवंत प्रमाण है. यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके विनाश और पुनरुत्थान की कहानी भारत के गौरवशाली अतीत और संघर्ष को भी दर्शाती है.

सबसे पहली बार किसने बनवाया था सोमनाथ मंदिर?

पौराणिक मान्यताओं और ऋग्वेद के अनुसार, सोमनाथ मंदिर का निर्माण सबसे पहले स्वयं चंद्रदेव (सोमराज) ने किया था. कथाओं के अनुसार, प्रजापति दक्ष के श्राप से मुक्ति पाने के लिए चंद्रदेव ने इसी स्थान पर भगवान शिव की घोर तपस्या की थी. जब शिव प्रसन्न हुए, तो चंद्रदेव ने यहां सोने का मंदिर बनवाया. मान्यताओं के अनुसार, बाद में रावण ने इसे चांदी से, भगवान श्रीकृष्ण ने चंदन की लकड़ी से और अंततः राजा भीमदेव ने इसे पत्थरों से बनवाया था.

महमूद गजनवी का हमला

सोमनाथ मंदिर की महिमा और इसके पास मौजूद अगाध संपत्ति की चर्चा पूरी दुनिया में थी. प्रसिद्ध अरब यात्री अल-बरूनी के वृत्तांतों को पढ़कर महमूद गजनवी ने सन 1025 में इस मंदिर पर आक्रमण किया. उसने मंदिर की संपत्ति लूटी, शिवलिंग को खंडित किया और पूरे ढांचे को तहस-नहस कर दिया. गजनवी के बाद भी, दिल्ली सल्तनत के अलाउद्दीन खिलजी (1297) और बाद में औरंगजेब जैसे शासकों ने इसे कई बार नष्ट किया, लेकिन हर बार हिंदुओं की आस्था ने इसे फिर से खड़ा कर दिया.

सोमनाथ मंदिर का पुननिर्माण

स्वतंत्रता के बाद, आधुनिक सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का श्रेय भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को जाता है. उन्होंने नवंबर 1947 में जूनागढ़ की मुक्ति के बाद मंदिर के पुनरुद्धार का संकल्प लिया था. हालांकि, गांधीजी की सलाह पर यह काम सरकारी धन के बजाय जनता के सहयोग (ट्रस्ट) से किया गया.

मंदिर का निर्माण चालुक्य शैली (कैलाश महामेरु प्रासाद) में किया गया. सरदार पटेल के निधन के बाद के.एम. मुंशी ने इस कार्य को आगे बढ़ाया. वर्तमान मंदिर का प्राण-प्रतिष्ठा समारोह 1951 में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में हुआ. अंततः, 1 दिसंबर 1995 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया.

सोमनाथ मंदिर की महिमा

सोमनाथ मंदिर को ‘प्रभास तीर्थ’ के नाम से भी जाना जाता है. यहां का बाण स्तंभ यह दर्शाता है कि इस बिंदु और दक्षिणी ध्रुव के बीच पृथ्वी का कोई भी भू-भाग (जमीन) नहीं है. यह मंदिर न केवल वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है, बल्कि यह हर बार गिरकर फिर से उठ खड़े होने वाले भारतीय स्वाभिमान का प्रतीक भी है.

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