धार्मिक नगरी वृंदावन में लोकप्रिय गीत-संगीत, भजन-कीर्तन और पुष्प-वर्षा के बीच दिवाली त्योहार मनाया गया और कहीं कोई पटाखा नहीं जलाया गया. प्रदूषण रहित दिवाली मनाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अनुपालन करते हुए शाम में वृंदावन वासियों ने सिर्फ मिट्टी के दीए और मोमबत्तियों से अपने घरों को रोशन किया.Also Read - इस बार भव्य होगा अयोध्या का 'दीपोत्सव', विश्व कीर्तिमान बनाने की तैयारी में योगी सरकार

दीपावली पर पटाखे जलाने से पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ता है और सुप्रीम कोर्ट ने भी इको-फ्रेंडली दिवाली मनाने का निर्देश दिया है. इस लिहाज से वृंदावन वासियों द्वारा हरित दिवाली मनाने का फैसला काफी महत्वपूर्ण है. वृंदावन में रह रहीं बंगाल की विधवा मनु घोष ने कहा, “हमने इस बार पटाखे और फुलझड़ी को छुए बिना दिवाली मनाने का फैसला लिया.” उन्होंने बताया कि यहां गोपीनाथ मंदिर में अनेक दूसरी विधवाओं ने भी इस बार मिट्टी के दीए जलाए और वे फूलों और दीयों से दीपावली मना रही हैं. Also Read - Whatsapp के नए फीचर ने मचाई धूम, ऐसे बनाएं अपनी फोटो के स्टिकर्स

पास के आश्रम में 30 साल से रह रहीं ललिता अधिकारी और कनक लता ने भी बताया कि वे पटाखे रहित दिवाली मना रही हैं क्योंकि पटाखे जलाने से शोर-गुल और धुआं फैलते हैं जो उनके लिए समस्या पैदा करते हैं. उन्होंने कहा, “हम भविष्य में भी पटाखे रहित दिवाली मनाना चाहते हैं.” दिल्ली-एनसीआर में पिछले साल दिवाली और उसके बाद वायु प्रदूषण के स्तर के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के आलोक में यहां पहली बार विधवाओं ने प्रदूषण रहित दिवाली मनाई. Also Read - लोगों ने समय सीमा के बाद भी फोड़े पटाखे, जमकर हुआ SC के आदेश का उल्लंघन

अदालत ने इस बात का अवलोकन किया कि पटाखों के बुरे परिणामों के कारण वायु की गुणवत्ता बहुत की खराब और चिंताजनक बन गई थी. दीए जलाकर अंधेरा मिटाने की परंपरा का पालन करते हुए गोपनीनाथ मंदिर में सुलभ इंटरनेशनल की ओर से आयोजित हरित दिवाली कार्यक्रम में आसपास के आश्रमों से करीब 700 विधवाओं ने हिस्सा लिया.

करीब 400 साल पुराने गोपीनाथ मंदिर के अहाते को रंगोली और मिट्टी के दीयों से सजाया गया था. इसके अलावा विधवाओं ने बाद में भजन-कीर्तन भी किया. सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक ने कहा, “इनके जीवन की सांझ वेला में खुशियों की किरणें लाने के लिए हमने अनोखे तरीके से दीपोत्सव का त्योहार मनाया.” सुलभ की ओर से यहां विधवाओं की रोजमर्रा की जरूरतों की पूर्ति करने के अलावा उनको स्वास्थ्य सुविधा और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है.

(इनपुट आईएएनएस)