भारत में महिलाओं के अधिकारों के लिए ढेर सारे नियम बनाए गए हैं। समाज में जो स्थिति महिलाओं की है उसे देखते हुए ये जरूरी भी हो जाता है, लेकिन कई बार इन नियमों का दुरुपयोग भी होता है। अक्सर देखा गया है महिलाएं अपने व्यक्तिगत हित साधने और आपसी रंजिश का बदला लेने के लिए पुरुषों के खिलाफ इस तरह के कानूनों का गलत फायदा उठाती हैं। अब ऐसे में सताए गए पुरुषों के सामने बड़ी चुनौती होती है कि वे अपनी शिकायत लेकर कहां जाएं? क्योंकि भारत में महिलाओं को लेकर कानून इतने सख्त हैं कि उनकी कोई सुनता ही नहीं। लेकिन एक महिला ऐसी भी है जो इस तरह के पुरुषों के अधिकारों के लिए लड़ रही है।Also Read - supreme court verdict on abortion | गर्भपात के लिए महिला को पति की इजाजत की जरूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट

31 वर्षीय दीपिका नारायण भारद्वाज पेशे से डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर हैं और वे महिलाओं द्वारा शोषित पुरुषों के लिए आवाज उठा रही हैं। वे धारा 498A (दहेज कानून) के दुरुपयोग के खिलाफ लड़ रही हैं। ये कानून बनाया तो महिलाओं को दहेज की कुप्रथा से बचाने के लिए गया था, पर इसका दुरुपयोग भी सबसे ज़्यादा किया गया।

दीपिका कहना है कि महिलाओं की बात करने के लिए तो कई सामाजिक कार्यकर्ता हैं लेकिन पुरुषों की कोई बात नहीं करता। ऐसा नहीं है कि सिर्फ महिलाओं का ही पुरुषों के द्वारा शोषण किया जाता है पुरुषों का भी शोषण होता है।  यह भी पढ़ें: यहां अपने पिता के साथ होती है बेटी की शादी

पत्रकार रह चुकी दीपिका ने ये लड़ाई तब शुरु की जब 2011 में उनके कजिन की शादी टूटी तो उसकी पत्नी ने पूरे परिवार के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज करा दिया। हांलाकि किसी तरह उस समय उनके परिवार ने पैसे ले देकर मामले को रफा दफा किया लेकिन दीपिका ने इस कानून के दुरुपयोग को रोकने की ठान ली और आज इसे लेकर एक अभियान चला रही हैं।

दीपिका ने बताया कि उनके सामने ऐसे भी मामले आए जहां झूठे आरोप में फंसाए जाने के कारण लड़के के मां-बाप ने समाज में नाम ख़राब होने की वजह से आत्महत्या तक कर ली।  उन्होंने इस मुद्दे पर ‘Martyrs of Marriage’ नाम की फ़िल्म भी बनायी है। आंकड़ों की मानें तो पिछले कई सालों में पतियों द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामलों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है वहीं पत्नियों के आत्महत्या के मामले में तेजी से गिरावट दर्ज की गई। यह भी पढ़ें: भारत में पहली बार हुई समुद्र के भीतर शादी

2012 में हुए निर्भया कांड के बाद बालात्कार से जुड़े कई कानूनों में बदलाव किया गया और इन्हें सख्त बनाया गया। इनका भी महिलाओं ने कई बार पुरुषों को फंसाने के लिए गलत इस्तेमाल किया। इसके खिलाफ दीपिका ने अपनी आवाज बुलंद की। इस मुहिम में कई बार उन पर महिला विरोधी होने के आरोप भी लगे लेकिन उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई महिला या पुरुष को लेकर नहीं है उनकी लड़ाई अन्याय के खिलाफ है।