World Obesity Day: Obese and diabetic at risk of liver disease

Gettyimages

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर: मोटापे के कारण अनियंत्रित मधुमेह (Diabetes) से ग्रस्त 52 वर्षीय शीला जोशी (बदला हुआ नाम) को शायद इसका अंदाजा भी नहीं है कि वह धीरे-धीरे यकृत की बीमारी की तरफ बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला सिर्फ जोशी का ही नहीं है, बल्कि अधिकांश भारतीय इस परिस्थिति से नावाकिफ होते हैं और जब मामला गंभीर हो जाता है तब सचेत होते हैं। Also Read - World Diabetes Day 2021: हेल्दी मानी जाने वाली ये चीजें डायबिटीज के मरीजों के लिए हो सकती हैं बेहद खतरनाक, बना लें दूरी

सर गंगाराम हॉस्पिटल में सेवारत लैप्रोस्कोपिक, रोबोटिक और बैरिएट्रिक सर्जन (Laparoscopic, Robotic and Bariatric Surgeon) तरुण मित्तल ने आईएएनएस से कहा, “भारत में लोगों की आम धारणा है कि लीवर की बीमारियां शराब पीने वाले लोगों में ही होती है और शराब न पीने वालों को लीवर की बीमारी न के बराबर ही होती है। लेकिन ताजा अध्ययनों एवं शराब न पीने वाले लोगों में होने वाली यकृत (Liver) की बीमारी के जागरूकता अभियानों में स्पष्ट किया गया है कि यह सिर्फ शराब पीने से संबंधित नहीं है।” Also Read - Diwali 2021 Tips For Diabetes Patients: त्योहार में नहीं बढ़ेगा शुगर लेवल, डायबिटीज के मरीज फॉलो करें ये खास टिप्स

नोएडा स्थित जेपी हॉस्पिटल में आंत्रशोथ एवं बैरिएट्रिक सर्जन विकास सिंघल ने आईएएनएस से कहा, “मोटापा और मधुमेह (Diabetes) यकृत की बीमारी से ग्रस्त शराब न पीने वाले लोगों में इसका खतरा और बढ़ा देता है। वास्तव में मोटापे और मधुमेह को ऐसे लोगों में खतरे के सूचक के तौर पर देखा जाना चाहिए।” Also Read - Karva Chauth 2021 Special: डायबिटीज से पीड़ित महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखने से पहले इन बातों का रखें खास ख्याल

मित्तल ने बताया कि यकृत की बीमारी से ग्रस्त  शराब न पीने वाले लोगों में यकृत के खराब होने का खतरा कई अन्य कारणों से भी बढ़ जाता है, जिसमें कुपोषण, गर्भ के कारण यकृत का खराब होना, नशीली दवाएं और यहां तक एचआईवी (HIV) और हेपेटाइटिस-सी (Hepatitis-C) शामिल हैं।

मैक्स हेल्थकेयर के उपाध्यक्ष और मेटाबोलिक एवं बैरिएट्रिक सर्जन प्रदीप चौबे के अनुसार, कई बार पेट में दर्द या गर्भ के लिए होने वाले अल्ट्रासाउंड (ultrasound) जांच के दौरान लीवर में सूजन की बीमारी का पता चलता है।

चौबे ने आईएएनएस से कहा, “कुछ लोगों का यकृत अतिरिक्त रूप से मोटा हो जाता है, जिसे फैटी लीवर कहते हैं। हालांकि यह एक सामान्य अवस्था नहीं है, लेकिन यदि पेट में जलन या और कोई समस्या पैदा नहीं करता तो यह कोई गंभीर बात नहीं है।”

नोवा स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में वरिष्ठ बैरिएट्रिक सर्जन आशीष भनोट ने इस बीमारी के सर्वश्रेष्ठ उपचार के बारे में कहा, “नियमित व्यायाम, तेज गति से टहलना, मधुमेह और मोटापे को नियंत्रित रखना कुछ अच्छे उपचार हैं। मोटापा कम करने के लिए ऑपरेशन करवाने से भी फैटी लीवर का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मरीजों के लिए सबसे अच्छा उपचार है शरीर का वजन कम करना।”

– श्वेता शर्मा