चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन है। आज माता के चौथे रूप माता कुष्मांडा की पूजा होती है। कहा जात है कि इन नौ दिनों में अगर पूरी श्रद्धा से माता की आराधना करो, तो आपके मन की हर इच्छा पूरी होती है और आपके जीवन की हर कठिनाई दूर हो जाती है। इसलिए कहा जाता है कि इन नौ दिनों में अपने चित्त को माँ के ध्यान में लगाना चाहिए, जिससे आपकी हर इच्छा पूरी हो। आपको बता दें की जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब इसी देवी ने अपने ईषत्‌ हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए इसे सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति कहा गया है।Also Read - Worship goddess Mahagauri on eighth day of Chitra Navratri । चैत्र नवरात्रि 2016: मां महागौरी को प्रसन्न करने के उपाय

माँ के मात्र से भक्त के सारे संकट पलभर में दूर हो जातें है इस देवी की आठ भुजाएं हैं, इसलिए अष्टभुजा कहलाईं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। इस देवी का वाहन सिंह है और इन्हें कुम्हड़े की बलि प्रिय है। संस्कृति में कुम्हड़े को कुष्मांड कहते हैं इसलिए इस देवी को कुष्मांडा। कुष्मांडा देवी का वास सूर्यमंडल के भीतर लोक में है। सूर्यलोक में रहने की शक्ति क्षमता केवल इन्हीं में है। इसीलिए इनके शरीर की कांति और प्रभा सूर्य की भांति ही है। इनके ही तेज से दसों दिशाएं आलोकित हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में इन्हीं का तेज व्याप्त है। Also Read - Worship goddess Katyayani on sixth day of Chitra Navratri । चैत्र नवरात्रि 2016: मां कात्यायनी को प्रसन्न करने के उपाय

इनकी आराधना से मनुष्य त्रिविध ताप से मुक्त होता है। माँ कुष्माण्डा सदैव अपने भक्तों पर कृपा दृष्टि रखती है। इनकी पूजा आराधना से हृदय को शांति एवं लक्ष्मी की प्राप्ति होती हैं। ”सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च। दधानाहस्तपद्याभ्यां कुष्माण्डा शुभदास्तु में॥“