अश्‍वत्थामा ने महाभारत में छल से पांडवों के पुत्र की हत्या कर दी थी, इसपर भगवान श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा को श्राप दिया था

26 Feb, 2024

Shweta Bajpai

वह धरती पर तब तक पीड़ा झेलते हुए जीवित रहेगा, जब तक स्वयं महादेव उसे पापों से मुक्ति न दिलाएं

कहा जाता है कि महाभारत के कई प्रमुख चरित्रों में से एक अश्वत्थामा का वजूद आज भी है

बताते हैं कि कानपुर के बांका छतरपुर के एक मंदिर में अश्‍वत्थामा रात के अंधेरे में शिव जी की पूजा करने आते हैं

ये मंदिर उत्तर प्रदेश के कानपुर के शिवराजपुर जगह में शिव जी का यह मंदिर स्थित है

इसका नाम खेरेश्वर धाम मंदिर है, माना जाता है कि अश्‍वत्थामा यहां खुद भोलेनाथ की पूजा करते हैं

अश्वत्थामा रात के अंधेरे में चुपके से आकर भगवान शंकर की पूजा करते हैं

वे उन्हें फूल-माला चढ़ाने के अलावा मंत्र का जाप करते हैं

यहां के पुजारी बताते हैं कि सुबह मंदिर के कपाट खोलने पर चीजें बिखरी हुईं मिलती हैं

पुजारी का ये भी कहना है कि 36 पीढ़ियो से वो इस मंदिर की सेवा कर रहा है

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