आज भी अयोध्या झेल रही सीता माता का ये श्राप

26 Jan, 2025

Gaurav Barar

कहा जाता है कि सीता माता के इसी श्राप के कारण अयोध्‍या नगरी की कभी तरक्‍की नहीं हो पाई.

भगवान राम की जन्मस्थली होने के बाद भी इस स्थान को वह पहचान नहीं मिल रही थी जो मिलनी चाहिए थी.

अयोध्या की इस दुर्दशा को लोग सीता माता के श्राप से जोड़कर देखते हैं.

अयोध्या लौटने पर एक तरफ तो घी के दीपक जलाकर खुशियां मनाई जा रही थीं

तो दूसरी तरफ माता सीता को लेकर अयोध्या के लोग आपस में खुसुर फुसुर कर रहे कि वह पराए मर्द रावण के साथ रहकर आई हैं.

माता सीता की पवित्रता पर अयोध्‍या की प्रजा को संदेह हो रहा था. यह देखकर भगवान राम ने माता सीता का त्‍याग करने का फैसला किया.

एक धोबी द्वारा तंज कसने पर प्रभु राम ने सीता माता को त्‍यागने का निर्णय लिया. उसके बाद उन्‍होंने लक्ष्‍मण के साथ सीता माता को फिर से वनवास भेज दिया.

जब सीता माता को अयोध्या के लोगों की इस हरकत के बारे में पता चलो तो वह क्रोध से भर गईं.

उन्होंने यह शाप दे दिया कि जिस प्रकार अपने पति से दूर रहकर वह वनवास में खुश नहीं रह पाएंगे उसी प्रकार के अयोध्‍या के लोग भी सदैव दुखी रहेंगे.

अयोध्या सदैव उजड़ी रहेगी और यहां के लोग सदैव दरिद्र रहेंगे.

कहते हैं कि सीता माता के शाप का प्रभाव महाभारत के युद्ध में दिखा था.

जबा रघुवंश के आखिरी राजा यानी प्रभु राम के आखिरी वंशज राजा बृहद्बल की मृत्यु हो गई थी और उसके बाद अयोध्‍या नगरी हमेशा वीरान ही रही.

डिस्क्लेमर: ये खबर लोक मान्यताओं पर आधारित है. इस खबर में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए India.com उत्तरदायी नहीं है.

Thanks For Reading!

Next: Mahabharat Katha: कर्ण ने मरने से पहले आखिरी बार क्या दान किया?

Find Out More