दुर्वासा ऋषि ने क्यों दिया माता सरस्वती को श्राप?

31 Jan, 2025

Shivani sharma

भारत में नदियों का बहुत महत्व है. यहां नदियों को न केवल देवी समझकर पूजा जाता है बल्कि उनसे जुड़ी कई पौराणिक कथाएं भी प्रचलित हैं.

किस नदी का उद्गम कैसे हुआ और वो किस देवी का स्वरूप है, इससे जुड़ी कथाएं हैं, ठीक उसी प्रकार कुछ नदियों से श्राप से जुड़े किस्से भी प्रसिद्ध हैं.

चलिए जानते हैं ऐसी ही कुछ नदियों के बारे में जिन्हें कभी न कभी किसी कारणवश श्राप मिला था और वे उसे आजतक भुगत रही हैं.

सरस्वती नदी वैदिक काल में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती थी.आज भी गंगा और यमुना के साथ सरस्वती नदी का नाम लिया जाता है.

सरस्वती नदी भूमि के अंदर से होकर बहती थी लेकिन आज ये सूखने के कगार पर है और लगभग लुप्त हो चुकी है.

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार ऋषि दुर्वासा वेद ज्ञान के लिए ब्रह्मलोक गए और उन्होंने ब्रह्मदेव से वेद की ऋचाएं सिखाने की विनती की.

वेद की ऋचाएं गायन के पद में थीं इसलिए ब्रह्मदेव उन्हें गाकर सुना रहे थे. मगर जब ऋषि दुर्वासा उन्हें दोहरा रहे थे तो मोटी आवाज के कारण स्वर सही नहीं लगा.

इस कारण उनके श्लोक के अक्षर और श्रुतियों में बार-बार गलती हो रही थी. इसे देख पास बैठी सरस्वती नदी ऋषि दुर्वासा पर हंस पड़ी.

ऋषि दुर्वासा ने इसे अपमान समझ लिया और पलभर में क्रोधित होकर सरस्वती देवी को अहंकारी कह डाला.

इसके बाद उन्होंने सरस्वती देवी को श्राप दिया कि उनकी स्वर और वाणी पानी की तरह बिखर जाएगी

वो धरती पर सहज और सुलभ होकर बहेगी, जिसके बाद सरस्वती अगले ही पल नदी में बदलकर ब्रह्नलोक से गिरकर धरती पर आ गईं.

आगे जाकर महर्षि वेदव्यास ने सरस्वती नदी को श्राप दे दिया कि वो कलयुग के आने तक विलुप्त हो जाएंगी.

कल्कि अवतार के बाद ही उनका धरती पर आगमन होगा और तब सरस्वती नदी में स्नान करने भर से व्यक्ति को सुखों की प्राप्ति होगी.

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