हनुमान जी को संजीवनी बूटी लाने में कितना समय लगा था?

22 Jan, 2025

Shivani sharma

रामायण की कथा के मुताबिक लंका में लक्ष्मण जी के मूर्छित होने पर सुश्रेन वैघ ने संजीवनी बूटी लाने को कहा था.

बता दें कि ये संजीवनी बूटी हिमालय की द्रोणागिरी पर्वत पर पाई जाती थी, जो लंका से करीब 5 हजार किलोमीटर दूर था.

भगवान राम ने हनुमान जी को ये कार्य सौंपा क्योंकि वे अपनी शक्ति और गति से इसे शीघ्र ला सकते थे.

रामायण के मुताबिक प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद लेते ही हनुमान जी ने पर्वत की तरफ अपनी उड़ान भरी.

कई कथाओं में बताया जाता है कि हनुमान जी की तीव्र गति के चलते उन्हें हिमाचल से लंका तक संजीवनी बूटी लाने में केवल 2 घंटे का समय लगा था.

इस संजीवनी बूटी से लक्ष्मण जी को जीवन दान मिला था. इसके लिए प्रभु श्रीराम ने हनुमान जी का बहुत आभार जताया था.

इस दौरान हनुमान जी को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा. मार्ग में उनका सामना कालनेमि राक्षस से हुआ.

कुछ कथाओं में बताया गया कि उन्होंने एक रात में संजीवनी बूटी लाने का कार्य पूरा किया था.

द्रोणागिरी पर्वत पर पहुंचने के बाद हनुमान जी को जड़ी बूटी की पहचान नहीं थी इसलिए वो पूरे के पूरे पर्वत को ही उठाकर ले आए.

Thanks For Reading!

Next: मक्का-मदीना के भीतर क्या है, इस्लाम में सबसे पवित्र क्यों माना जाता है

Find Out More