6 महीने के लिए क्यों सो जाता था कुंभकर्ण? जानें इसकी कहानी

30 Jan, 2025

Shilpi Singh

दरअसल, एक बार कुंभकर्ण ने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की. वो उनसे वरदान चाहता था, तो तपस्या में लगा रहा.

ब्रह्मा जी खुश हो गए और वरदान देने के लिए प्रकट हो गए लेकिन इससे बाकि देवताओं के परेशानी हो गई और कुंभकर्ण को ‘इंद्रासन’ यानि इंद्र की गद्दी चाहिए थी.

मगर वरदान मांगते वक़्त उसकी ज़ुबान ऐसी फ़िसली की वो ‘इंद्रासन’ की बजाय ‘निंद्रासन’ (नींद के लिए बिस्तर) मांग बैठा.

कहते हैं कि ये देवी सरस्वती थीं, जिन्होंने कुंभकर्ण की ज़ुबान से शब्द निकलवाया. क्योंकि, डर था कि अगर कुंभकर्ण देवताओं का राजा बना, तो स्वर्ग को भी नरक बना देगा.

बस जब कुंभकरण को ये एहसास हुआ कि उसने ग़लती से ‘निंद्रासन’ मांग लिया है, तो झटका खा गया.

मगर तब तक देर हो चुकी थी. क्योंकि, ब्रह्मा जी ने वरदान दे दिया था.

कहते हैं कि रावण ने भी अनुरोध किया था कि वरदान को वापस ले लें. मगर ब्रह्मा जी वरदान देने के बाद वापस नहीं लेते, तो उन्होंने नहीं लिया.

कुंभकर्ण को यह वरदान देते हुए ब्रह्मा जी ने यह भी कहा था कि यदि कोई भी उसे बलपूर्वक जगाने का प्रयास करेगा तो वह कुंभकर्ण के जीवन का अंतिम दिन होगा.

ब्रह्मा जी के यह वचन सत्य हुए जब रावण युद्ध में प्रभु श्रीराम से हारने लगा तब रावण ने कुंभकर्ण को बलपूर्वक जगाया और सहायता मांगी जिसके बाद उसी दिन युद्ध में कुंभकर्ण की मृत्यु हो गई.

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