महाकुंभ से लौटने लगे नागा साधु, जानिए अब कहां जमाएंगे अपना डेरा और क्या करेंगे?
18 Feb, 2025
Shivani sharma
महाकुंभ में नागा साधुओं को सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र माना जाता है. सनातन धर्म में नागा साधुओं को धर्म का रक्षक माना गया है.
नागा साधुओं बनने के लिए 12 वर्षों की कठोर तपस्या करनी पड़ती है. नागा साधु भगवान शिव के वैरागी स्वरूप की पूजा करते हैं.
नागा साधु, बिना कपड़े के, शरीर पर भस्म और लंबी जटाओं की वजह से भीड़ में सबसे अलग नजर आते हैं.
देशभर से आए नागा साधु महाकुंभ में लोगों के लिए सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बने.
वसंत पचंमी के आखिरी अमृत स्नान के बाद धीरे-धीरे सभी नागा साधु लौटने लगे हैं. ऐसे में अब सवाल उठता है कि नागा साधु अब प्रयागराज से प्रस्थान करते हुए कहां जाएंगे और क्या करेंगे.
प्रस्थान से पहले नागा साधु परंपरा के मुताबिक, कढ़ी-पकौड़ी का भंडारा करते हैं. इसके बाद वह अपने शिविर में लगे धर्म ध्वज की डोर भी ढीली कर देते हैं.
इस बार महाशिवरात्रि 26 फरवरी को है. ऐसे में 13 में से 7 अखाड़े महाकुंभ से सीधे काशी जाएंगे. यहां पर महाशिवरात्रि तक अपना डेरा जमाएंगे.
इसके बाद वे अपने-अपने अखाड़ों में वापस लौट जाएंगे. महाशिवरात्रि के मौके पर नागा साधु काशी में शोभायात्रा निकालेंगे और मसाने की होली खेलेंगे.
आपको बता दें कि अखाड़ो में नागा साधुओं को अनुशासन और संगठित जीवन जीने की शिक्षा दी जाती है.
Disclaimer- यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है. india.com किसी भी तरह ,इस जानकारी की पुष्टि नहीं करता.
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