इन साधुओं को नहीं होता किसी को छूने का अधिकार! 

22 Jan, 2025

Gaurav Barar

संगम तट पर लगे महाकुंभ में लाखों साधु-संत अपनी धुनी रमाए प्रभु की भक्ति में लीन हैं.

इनमें नागा साधु, अघोरी, साधु, संत शामिल हैं.

इन संतों में कई तरह के संन्यासी आए हुए हैं, जिन्हें लेकर कई तरह के रहस्य बने हुए हैं. जैसे नागा, अघोरी आदि.

ऐसे ही एक संन्यासी हैं, जिन्हें दंडी स्वामी कहा जाता है.

माना जाता है कि कुंभ में अगर इनके दर्शन नहीं किए तो तीर्थ का कोई मतलब नहीं है.

इन स्वामियों का जीवन काफी कठिन होता है. इसके अलावा, इन्हें कोई नहीं छू सकता, इसकी अनुमति नहीं होती.

इन संन्यासियों को छूने का अधिकार किसी को नहीं होता और न ही खुद को छूने देने का अधिकार होता है.

इन संन्यासियों की सबसे बड़ी पहचान उनका दंड होता है, इसे संन्यासी अपनी और परमात्मा के बीच की कड़ी मानते हैं.

इस दंड को काफी पवित्र माना जाता है. दंडी शब्द जंगल में बने सर्पीले रास्ते को बताता है.

इसलिए वह संन्यासी जो दंड लेकर हमेशा पैदल चलता रहता है या यात्रा करता है, उसे ही दंडी स्वामी कहा गया.

दंडी स्वामी शंकराचार्य बनाते हैं. शंकराचार्य के हाथ में बांस की डंडी या कपड़े से ढका दंड तो देखा ही होगा.

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