Mahabharat Katha: कर्ण ने मरने से पहले आखिरी बार क्या दान किया?

26 Jan, 2025

Pooja Batra

कर्ण को 'दानवीर' कहा जाता था, क्योंकि वह अपने जीवन में कभी भी किसी को दान देने से मना नहीं करते थे.

उनके जीवन का अंतिम दान भी उनकी उदारता और महानता का प्रतीक है.

जब कर्ण युद्ध में घायल होकर मृत्यु शैया पर पड़े थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने एक ब्राह्मण का रूप धारण कर उनसे दान मांगा.

कर्ण ने अपनी स्थिति को देखकर कहा कि उनके पास अब कुछ भी बचा नहीं है, जो वह दान कर सकें.

इस पर ब्राह्मण रूपी श्रीकृष्ण ने कहा कि उनके पास अभी भी उनका सोने का दांत है, जो वह दान कर सकते हैं.

कर्ण ने अपने सोने के दांत को निकालने के लिए पत्थर उठाया और उसे तोड़कर ब्राह्मण को दान कर दिया.

उनकी इस दानशीलता को देखकर श्रीकृष्ण अत्यंत प्रभावित हुए और उन्होंने कर्ण को मृत्यु के बाद मोक्ष का वरदान दिया

कर्ण का अंतिम दान उनकी निस्वार्थता और दानवीरता का प्रतीक है.

उन्होंने अपने पूरे जीवन में दूसरों की मदद करने को प्राथमिकता दी, यहां तक कि मृत्यु के समय भी.

यह घटना सिखाती है कि सच्ची उदारता परिस्थिति की परवाह किए बिना होती है

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