नागा साधु सालों-महीनों तक पानी से रहते हैं दूर, महाकुंभ से पहले क्यों नहीं नहाते बाबा?
21 Jan, 2025
Akarsh Shukla
महाकुंभ में नागा साधुओं का महत्व अत्यधिक है, और उनके अमृत स्नान के साथ ही महाकुंभ का आरंभ होता है.
नागा साधु महीनों या वर्षों तक नहीं नहाते, क्योंकि वे मानते हैं कि राख (भस्म) का लेप और ध्यान-योग से ही शुद्धि होती है.
भस्म का उपयोग शरीर की बाहरी शुद्धि के बजाय आंतरिक शुद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए किया जाता है.
नागा साधु कठोर तपस्या करते हैं और गुफाओं-कन्दराओं में निर्वस्त्र रहकर साधना करते हैं.
नागा साधुओं को दीक्षा के समय कामेन्द्रिय भंग की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जो अखाड़े के ध्वज के नीचे वैदिक मंत्रों के साथ संपन्न होती है.
ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले साधुओं को ब्रह्मचारी से महापुरुष बनाया जाता है, जिन्हें पंच देवता के प्रतीक और रुद्राक्ष, भस्म, भगवा जैसे आभूषण दिए जाते हैं.
महापुरुष के बाद नागा साधुओं को अवधूत बनाया जाता है, जिसमें उन्हें अपने बाल कटवाने के साथ खुद का तर्पण और पिंडदान करना होता है.
अवधूत बनने के बाद नागा साधु संसार और परिवार से मुक्त होकर केवल सनातन धर्म और वैदिक परंपराओं की रक्षा में जीवन बिताते हैं.
नागा साधु अपने बाल और दाढ़ी नहीं कटाते, जो उनके साधना और सांसारिक त्याग का प्रतीक है.
बढ़े हुए बाल और जटाएं शिव के प्रति उनकी भक्ति को दर्शाती हैं और इसे आध्यात्मिक ऊर्जा के संरक्षण के लिए लाभकारी माना जाता है.
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