कौन होते हैं नीच व्यक्ति? पितामाह ने युधिष्ठिर को बताई थी पहचान
महाभारत के शांति पर्व में युधिष्ठिर बाणों की शय्या पर लेटे पितामाह भीष्म से नीच व्यक्ति के लक्षणों के बारे में पूछते हैं.
तब भीष्म ने नीच और कपटी लोगों के कुछ लक्षण बताए थे, जिनसे आज भी ऐसे लोगों की पहचान संभव है.
भीष्म के मुताबिक, नीच व्यक्ति वह है, जो दूसरों की सहायता का आदर नहीं करता.
वह अपने शुभचिंतकों के प्रति भी आभार नहीं दिखाता और सिर्फ अपने ही फायदे-नुकसान की चिंता करता है.
ऐसे व्यक्ति शिक्षा और मार्गदर्शन देने वालों के प्रति भी आभारी नहीं होते और घमंड में जीते हैं.
ऐसे लोग अपने दान को भी बढ़ा-चढ़ाकर बताएंगे और वह उसका खूब ढिंढोरा पीटेंगे.
ये लोग दिन-रात सिर्फ अपनी ही तारीफों के पुल बांधते हैं और वे दूसरों के भी अच्छे कामों को छिपाकर अपनी तारीफ चाहते हैं.
वे निजी लाभ के लिए हमेशा झूठ का सहारा लेते हैं और सच छिपाकर रखते हैं.
ऐसे लोगों से पितामाह भीष्म ने हमेशा दूर रहने की सलाह दी है. आप भी बचकर रहें.
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