भगवान शिव को दामाद के रूप में क्यों पूजते हैं कश्मीरी पंडित?
24 Feb, 2025
Akarsh Shukla
कश्मीरी पंडित समुदाय में महाशिवरात्रि को 'हेरथ' कहा जाता है, जो भगवान शिव और माता उमा (पार्वती) के विवाह का प्रतीक होता है.
इस परंपरा में उमा को बेटी और भगवान शिव को दामाद के रूप में पूजा जाता है, जिससे यह पर्व आम शिवरात्रि उत्सवों से अलग बन जाता है.
मान्यता है कि माता उमा, जो हिमालय की बेटी हैं, उनका विवाह भगवान शिव से पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रस्मों के साथ मनाया जाता है.
शादी की तैयारियों के रूप में पंडित परिवार पंद्रह दिन पहले से विशेष पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान शुरू कर देते हैं.
‘हेरथ त्रुवह’ यानी त्रयोदशी के दिन ‘वटुक स्थापना’ की जाती है, जिसमें भगवान शिव और उनके गणों के प्रतीक स्वरूप बर्तन स्थापित किए जाते हैं.
भगवान शिव को दामाद मानने की परंपरा के चलते उनके स्वागत और सेवा के लिए विशेष पकवान बनाए जाते हैं, जिनमें मांस-मछली भी शामिल होता है.
पंडित परिवारों में विवाह से पहले देवताओं की पूजा के साथ शिवगणों की भी विशेष रूप से आराधना की जाती है.
इस दिन घर के बड़े व्यक्ति को व्रत रखना पड़ता है, जिसे भगवान शिव को भोग लगाने के बाद ही तोड़ा जाता है, ताकि उनका आशीर्वाद प्राप्त हो.
अगले दिन ‘सलाम’ की परंपरा निभाई जाती है, जिसमें सभी रिश्तेदारों और समाज के लोगों को शिव विवाह की शुभकामनाएं दी जाती हैं.
हेरथ पर्व की समाप्ति अमावस्या को होती है, जब वटुक को बहते पानी में प्रवाहित कर दिया जाता है और भगवान शिव का प्रसाद सभी सगे-संबंधियों में बांटा जाता है.
Thanks For Reading!
Next: Mahabharat: द्रौपदी ने अपने ही बेटे को क्यों दे दिया था मृत्यु का श्राप?