महाभारत का वो योद्धा जो चाहकर भी नहीं ले सकता था अपनी जान

28 Jan, 2025

Akarsh Shukla

अश्वत्थामा महाभारत के महान योद्धा और गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र था, जिसकी एक गलती ने उसके लिए अमरता को श्राप बना दिया था.

महाभारत युद्ध में अश्वत्थामा ने कौरव पक्ष का साथ दिया और पांडवों से अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने की ठानी.

गुरु द्रोणाचार्य की मृत्यु के बाद अश्वत्थामा ने कौरवों के पराजय के गुस्से में पांडवों के शिविर पर हमला किया.

अश्वत्थामा ने रात के अंधेरे में पांडवों के पांच पुत्रों की हत्या कर दी, जिन्हें उसने गलती से पांडव समझ लिया.

जब यह सच सामने आया कि उसने निर्दोष बालकों की हत्या की है, तो पांडव और भगवान श्रीकृष्ण बेहद क्रोधित हुए.

अश्वत्थामा ने क्रोध में ब्रह्मास्त्र का उपयोग किया, लेकिन अर्जुन ने भी ब्रह्मास्त्र चलाया, जिससे विनाश का खतरा उत्पन्न हो गया.

श्रीकृष्ण ने दोनों को ब्रह्मास्त्र वापस लेने का आदेश दिया, लेकिन अश्वत्थामा इसे वापस लेने में असमर्थ था.

अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र को पांडवों की वंश समाप्ति के लिए उत्तरा के गर्भ में पल रहे अभिमन्यु के पुत्र पर लक्षित कर दिया.

श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से उत्तरा के गर्भ में पल रहे बालक (परिक्षित) को बचा लिया और अश्वत्थामा को अमरता का श्राप दिया.

श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा को 3,000 वर्षों तक भटकने और अपनी गलतियों का बोझ उठाने का श्राप दिया, जिससे वह अमर होते हुए भी कष्टमय जीवन जीने को मजबूर हो गया.

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