Dhanteras 2025: समुद्र मंथन और भगवान धनवंतरि से जुड़ा है धनतेरस का रहस्य

14 Oct, 2025

Shilpi Singh

हिंदू पंचांग में कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाया जाता है.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि धनतेरस का संबंध समुद्र मंथन से भी है.

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक जब दुर्वासा ऋषि ने इंद्र को श्राप दिया था, तो इस श्राप के कारण सभी देवताओं की शक्तियां और चमक क्षीण हो चुकी थी.

इसके बाद राक्षसों ने देवताओं पर विजय प्राप्त कर ली. पूरे ब्रह्मांड में अंधकार फैल चुका था.

दैत्यों के बढ़ते अत्याचारों को देखते हुए सभी देवताओं ने श्रीविष्णु से सहायता की गुहार लगाई.

विष्णु ने देवताओं को अमरता का अमृत प्राप्त करने के लिए ब्रह्मांडीय सागर का मंथन करने की सलाह दी.

मंदार पर्वत मंथन की छड़ी बन गया और वासुकी नाग रस्सी, जिसके मदद से देवताओं और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया.

समुद्र मंथन से जो सबसे पहली चीज बाहर आई वो थी घातक विष हलाहल, जिसे भगवान शिव ने ग्रहण कर संपूर्ण सृष्टि को खत्म होने से बचाया था.

इसके बाद समुद्र मंथन से एक के बाद एक दिव्य निधियां प्राप्त हुई. देवी लक्ष्मी समृद्धि लेकर प्रकट हुई और अंत में भगवान धनवंतरि समुद्र से प्रकट हुए.

तभी से यह दिन धन्वंतरि त्रयोदशी या धनतेरस के नाम से जाना जाता है. यह दिन पृथ्वी पर स्वास्थ्य जीवन में दिव्य कल्याण का प्रतीक माना जाता है.

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