मराठा साम्राज्य के 'छत्रपति' और 'पेशवा' में जानें क्या होता था अंतर
23 Mar, 2025
Shilpi Singh
'छत्रपति' और 'पेशवा' मराठा साम्राज्य के मजबूत स्तंभ थे, लेकिन क्या आपको दोनों के बीच का अंतर पता है?
साल 1674 में छत्रपति शिवाजी महाराज ने मराठा साम्राज्य की स्थापना की थी और राज्याभिषेक के बाद खुद को 'छत्रपति' घोषित किया था.
छत्रपति को राजाओं का राजा कहा जाता था और यह मराठा साम्राज्य का सबसे ऊंचा पद था
वाजी के बाद कई पीढ़ियों तक इनके वंशजों ने इस पद को संभाला.
इतिहासकार बताते हैं कि छत्रपति की गद्दी शिवाजी महाराज के वंशजों की मिलती थी.
छत्रपति के बाद जो साम्राज्य का सबसे ताकतवर मंत्री होता था, उसे पेशवा कहा जाता था.
पेशवा बाजीराव प्रथम यानी श्रीमंत पेशवा बाजीराव बल्लाड़ भट्ट मराठा साम्राज्य के चौथे छत्रपति शाहूजी महाराज के पेशवा थे और उन्होंने अपनी युद्ध नीति और कौशल से कई युद्ध जीते थे
पेशवा एक पद था, जिन्हें नियुक्त किया जाता थाा और इसके बाद छत्रपति सिर्फ नाम के शासक रह गए थे और पूरी ताकत पेशवा के हाथ में आ गई थी
छत्रपति और पेशवा दोनों ही मराठा साम्राज्य के मजबूत स्तंभ होते थे
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