मशहूर शायर मुनव्वर राना का निधन हो गया है. मुनव्वर राना ने मां पर ऐसे शेर लिखे, जो बेहद मशहूर हुए.

14 Jan, 2024

Zeeshan Akhtar

ऐ अँधेरे! देख ले मुँह तेरा काला हो गया, माँ ने आँखें खोल दीं घर में उजाला हो गया.

मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊँ, माँ से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ

मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आँसू, मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना

जब तक रहा हूँ धूप में चादर बना रहा, मैं अपनी माँ का आखिरी ज़ेवर बना रहा.

किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई, मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई.

सिरफिरे लोग हमें दुश्मन-ए-जां कहते हैं, हम तो इस मुल्क की मिट्टी को भी माँ कहते हैं

लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती, बस एक माँ है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती

ख़ुद को इस भीड़ में तन्हा नहीं होने देंगे, माँ तुझे हम अभी बूढ़ा नहीं होने देंगे.

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है, माँ बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है

अभी ज़िन्दा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा, मैं जब घर से निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है

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