हुगली नदी पर बने मशहूर हावड़ा ब्रिज का क्या है इतिहास ?
10 Oct, 2024
Vaibhav Vivek
भारत की कई चीजें पूरी दुनिया में महशूर है, जिनमें हावड़ा में हुगली नदी पर बना हावड़ा ब्रिज भी है.
अपने निर्माण के समय पूरी दुनिया में हावड़ा ब्रिज तीसरा और वर्तमान में छठा सबसे लंबा कंटीलीवर पुल है.
हावड़ा ब्रिज बनाने का काम ब्रिटिश सरकार ने 1936 में शुरू किया था जो 1942 में जाकर पूरा हुआ.
3 फरवरी 1943 को इसे आम लोगों के खोला गया, लेकिन सबसे हैरानी वाली बात है कि आज तक इसका उद्घाटन नहीं किया गया.
हुगली नदी पर बने मशहूर हावड़ा ब्रिज का क्या है इतिहास ?
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दिसंबर 1942 में एक बम इस ब्रिज से कुछ ही दूरी पर गिरा था, लेकिन ब्रिज को कोई नुकसान नहीं पहुंचा.
हावड़ा ब्रिज को बनाने में 26,000 टन स्टील का इस्तेमाल हुआ था, जिसमें 23,000 टन टिस्कॉन स्टील की सप्लाई टाटा स्टील ने की थी.
इसके निर्माण का मुख्य श्रेय टाटा स्टील और बीबीजे कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के कामगारों को दिया जाता है जिसने तमाम बाधाओं के बाद भी इसका निर्माण किया था.
पूरा ब्रिज नदी के दोनों किनारों पर बने 280 फीट ऊंचे दो पिलरों पर टिका हुआ है. दोनों पिलरों के बीच की दूरी डेढ़ हजार फीट है.
सरकार ने नोबेल प्राइज विजेता रवींद्र नाथ टैगोर के नाम पर साल 1965 में हावड़ा ब्रिज का नाम रवींद्र सेतु कर दिया था. (सभी फोटो साभार-ब्रेथवेट बर्न एंड जेसप कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड कलकत्ता)
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