नालंदा विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में मुगल शासक ने क्यों लगवा दी थी आग?

09 Oct, 2024

Vaibhav Vivek

बख्तियार खिलजी एक क्रूर मुगल शासक था, जिसने बिहार के कुछ क्षेत्रों पर कुछ समय तक कब्जा कर लिया था. बख्तियार खिलजी का पूरा नाम इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी था.

बख्तियार खिलजी ने 1199 में नालंदा विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में आग लगवा दी थी. लाइब्रेरी इतनी बड़ी थी कि वहां लगी आग तीन महीनों तक धधकती रही थी.

इतिहासकार नालंदा विश्वविद्यालय को जलाने के पीछे की वजह बताते हैं कि एक समय बख्तियार खिलजी बहुत ज्यादा बीमार पड़ गया था.

उसने हकीमों से बीमारी का उपचार कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. तब किसी ने उसे नालंदा विश्वविद्यालय के आयुर्वेद विभाग के प्रमुख आचार्य राहुल श्रीभद्रजी से उपचार करवाने की सलाह दी.

आचार्य को बुलाकर खिलजी ने इलाज से पहले शर्त रखी कि वह किसी भारतीय औषधि का सेवन नहीं करेगा.

आचार्य श्रीभद्रजी के उपचार करने से खिलजी की बीमारी पूरी तरह से ठीक हो गई.

आचार्य श्रीभद्र ने कुरान के कुछ पृष्ठों के कोने पर एक दवा का अदृश्य लेप लगाकर उसे पढ़ने को कहा था.

खिलजी कुरान के कोने को पलटने के लिए थूक के साथ कुछ पेज चाट गया और मात्र उसी से वह ठीक हो गया.

खिलजी को अपने उपचार से खुशी नहीं हुई, बल्कि उसके मन में नफरत पैदा हो गई की भारतीय वैद्यों का ज्ञान मेरे हकीमों से ज्यादा क्यों है?

इसके बाद ही उसने नालंदा विश्वविद्यालय की विश्व प्रसिद्ध लाईब्रेरी को जला दिया. (सभी तस्वीरें AI से बनाई गई हैं)

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