क्यों सालों-साल खराब नहीं होता गंगाजल, कभी नहीं आती बदबू? जानिए

17 Oct, 2024

Gaurav Barar

पूजा-पाठ से लेकर हवन अनुष्ठान जैसे तमाम धार्मिक कार्यों में गंगा नदी के जल का इस्तेमाल होता है.

गंगाजल सालों-साल रखा रहता है पर न तो उसमें बदबू आती है ना कभी कीड़ा पड़ता है. जानिए ऐसा क्यों है.

इसका पता लगाने की शुरुआत पहली दफा 134 साल पहले हुई. 1890 के आसपास भारत के तमाम हिस्सों में अकाल के कारण भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई.

इस बीच प्रयागराज में हैजा से लोग मरने लगे. अधिकतर लोग लाशों को जलाने या दफनाने की जगह गंगा में प्रवाहित करने लगे.

उस वक्त ब्रिटेन के चर्चित वैज्ञानिक और बैक्टीरियोलॉजिस्ट अर्नेस्ट हैन्किन गंगाजल पर रिसर्च कर रहे थे.

वो यह देखकर दंग रह गए कि गंगा में हैजे से मरने वाले लोगों की लाश बहाने के बावजूद इस नदी का जल इस्तेमाल करने वाले दूसरे लोगों को कोई नुकसान नहीं हो रहा है.

उन्होंने गंगाजल के नमूने इकट्ठा किए और उनका विश्लेषण किया. उन्होंने पाया कि गंगाजल में बहुत कम बैक्टीरियल प्रदूषण था.

हैन्किन के बाद एक फ्रेंच वैज्ञानिक ने गंगाजल पर और रिसर्च किया. उन्होंने भी पाया कि गंगाजल में ऐसे वायरस पाए जाते हैं जो हैजा जैसी बीमारी के बैक्टीरिया को नष्ट कर देते हैं.

यही वायरस गंगाजल की शुद्धता के लिए जिम्मेदार थे. इन वायरस को निंजा वायरस कहा गया.

गंगाजल में और भी कई तरह के वायरस पाए जाते हैं जो बीमारी पैदा करने बैक्टीरिया से लड़ते हैं. इन्हीं वायरस के चलते गंगाजल में कभी बदबू नहीं आती है .

गंगाजल में करीब 1000 तरह के ‘बैक्टीरियोफेज’ पाए जाते हैं, जो बैक्टीरिया को नष्ट करने वाले वायरस हैं.

दूसरी नदियों में भी बैक्टीरियोफेज पाए जाते हैं, लेकिन इनकी संख्या कम है.

यही कारण है कि दूसरी नदियों के जल के मुकाबले गंगाजल आसानी से खराब नहीं होता है.

गंगाजल में सल्फर की मात्रा अधिक होती है, जो इसे लंबे समय तक खराब नहीं होने देती है.

गंगाजल की एक और खासियत ये है कि इसकी वायुमंडल से ऑक्सीजन सोखने की क्षमता काफी ज्यादा है. 

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