मरने के बाद नमक मजदूरों के पैर चिता में क्यों नहीं जलते? हैरान कर देगी वजह
20 Jan, 2025
Gargi Santosh
नमक के बिना खाने-पीने का सामान अधूरा है, लेकिन इसे बनाने वाले लोगों की जिंदगी बेहद कठिन होती है.
गुजरात में 50,000 से ज्यादा मजदूर नमक बनाने का काम कर रहे हैं, जिन्हें अगरिया कहते हैं.
जानकारी के अनुसार, ये मजदूर साल के 9 महीने खारे सफेद मैदानों में काम करते हैं.
नमक के प्रभाव से इनके पैर इतने सख्त हो जाते हैं कि मरने के बाद चिता में नहीं जलते.
चिता में पैर नहीं जलने के कारण इन्हें नमक में दबाया या दोबारा जलाया जाता है.
यही नहीं नमक के खेतों में काम करने से मजदूरों की त्वचा खराब होती है और आंखों में जलन होती है.
दिन-रात नमक के साथ काम करते हुए इनकी जिंदगी दर्दनाक और संघर्ष से भरी होती है.
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