अकबर के सबसे करीबी मंत्री बीरबील की कैसे हुई थी मौत
10 Mar, 2025
Akarsh Shukla
अकबर और बीरबल की दोस्ती जगजाहिर थी, लेकिन उनकी मौत की कहानी कम ही लोग जानते हैं. बीरबल की बढ़ती लोकप्रियता से कई दरबारी ईर्ष्या करते थे और इसी कारण उन्हें एक साजिश के तहत स्वाद घाटी भेज दिया गया.
स्वाद घाटी, जो आज पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में स्थित है, उस समय यूसुफजई कबीले के अधीन थी. 1586 में बीरबल को एक सैन्य अभियान के तहत वहां भेजा गया, लेकिन वहां उनकी हत्या कर दी गई.
इस युद्ध में बीरबल और उनके सैनिकों पर अचानक हमला हुआ. कुछ सैनिकों ने उन्हें धोखा दे दिया और अकेला छोड़कर भाग गए, जिससे उनकी हार और अंत निश्चित हो गया.
जब अकबर को अपने सबसे प्रिय सलाहकार और मित्र बीरबल की मौत की खबर मिली, तो वह बुरी तरह टूट गए और दो दिनों तक उन्होंने न तो कुछ खाया और न ही किसी राजकीय कार्य में हिस्सा लिया.
अकबर को इस घटना में किसी साजिश की बू आई, क्योंकि बीरबल जितने काबिल और होशियार थे, उनके इस तरह धोखे से मारे जाने की कल्पना करना कठिन था.
इतिहासकार बदायूनी लिखते हैं कि अकबर ने कभी किसी अमीर या सेनापति की मौत पर उतना दुख नहीं जताया, जितना उन्होंने बीरबल के निधन पर किया था.
बीरबल की मौत के बाद अकबर ने फतेहपुर सीकरी को छोड़ दिया, जहां वह लंबे समय से रह रहे थे, और इसके बाद वह पूरी तरह बदल गए.
इस घटना के कुछ वर्षों बाद अकबर की भी मृत्यु हो गई, और इतिहासकार मानते हैं कि बीरबल की मौत के बाद वह पहले जैसे नहीं रहे और मानसिक रूप से कमजोर हो गए थे.
बीरबल का जाना सिर्फ अकबर के लिए नहीं, बल्कि पूरे मुगल दरबार के लिए एक बड़ी क्षति थी, क्योंकि उनकी बुद्धिमानी और चतुराई की मिसाल पूरे राज्य में दी जाती थी.
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