West Bengal News: पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections 2021) होने हैं. ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के लिए नागरिकता संशोधन कानून (CAA) मददगार साबित होती है या उसकी मजबूती में सेंध लगाती है यह देखने वाली बात होगी. हालांकि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, CAA की मांग राज्य में तेज होती जा रही है. BJP महासचिव ने पार्टी की रैलियों में कई बार खुद इसका ऐलान किया है कि राज्य में जनवरी यानी अगले महीने से CAA लागू कर दिया जाएगा. Also Read - शिवपाल सिंह का बड़ा ऐलान, बोले- भाजपा से नहीं, सपा के साथ करेंगे गठबंधन

वोट बैंक के लिहाज से एक तरफ यह BJP के लिए बंगाल में फायदे का सौदा मालूम पड़ता है तो वहीं दूसरी ओर इससे काफी नुकसान भी हो सकता है. यह मामला इसलिए भी रोचक है, क्‍योंकि बंगाल के सा-साथ असम में भी विधानसभा चुनाव होने हैं. बंगाल में जहां BJP ममता सरकार को सत्ता से हटाकर पहली बार राज्य में सरकार बनाने के मिशन पर है. वहीं असम में उसकी सरकार पांच साल से चल रही है, जिसे बनाए रखने की कवायद उसे करनी है. Also Read - सुशील मोदी का केंद्र में जाना, शाहनवाज हुसैन का बिहार आना, बीजेपी के इस कदम के क्या हैं सियासी मायने!

सीएए को लेकर असम में भीषण बवाल हुआ था. अगर फिर से नागरिकता कानून पर बात आगे बढ़ी तो राज्य में BJP के लिए हालात प्रतिकूल हो सकते हैं. यही वजह है कि सीएए को लेकर BJP बंगाल और असम के बीच फंसी हुई दिखती है. CAA लागू होने के बाद बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. Also Read - पूर्वी मिदनापुर में सुवेंदु अधिकारी की रैली से पहले TMC-भाजपा कार्यकर्ताओं में हिंसक झड़प, कई घायल

वहीं बंगाल के BJP सांसद शांतनु ठाकुर ने कहा कि अगले हफ्ते बंगाल आ रहे गृहमंत्री अमित शाह इसे लेकर आश्वासन दें. दरअसल शांतनु मतुआ समुदाय से आते हैं. बंगाल में इस समुदाय की अच्छी खासी आबादी है. यह हिंदू शरणार्थी हैं, जो देश के विभाजन के दौरान और बाद के दशकों में पड़ोसी देश बांग्लादेश से आए हैं. मतुआ समुदाय में स्थायी नागरिकता की काफी समय से मांग है. बंगाल में जिस सीएए में BJP अपना सियासी फायदा देख रही है, असम में वही उसके लिए जंजाल बना हुआ है. मालूम हो कि सीएए कानून बनने के एक साल पूरे होने पर असम के लोग सड़क पर उतर आए थे. कई संगठनों ने नागरिकता संशोधन कानून के संसद से पास होने की वर्षगांठ को काले दिवस के रूप में मनाया.