नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में विधान सभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल का पारा ऊपर की तरफ बढ़ता जा रहा है. राज्य में रोजाना नए नए राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं. इस बीच राज्य में एक बड़ा राजनीति बदलाव देखने को मिल रहा है. सीएम ममता बनर्जी के करीबी और राज्य की सत्ता के मंच पर उन्हें बैठाने में अहम किरदार निभाने वाले पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ने अपनी नई पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया है. पीरजादा सिद्दीकी के इस फैसले से कई राजनीतिक दलों की चिंताएं बढ़ गई हैं. पीरजादा सिद्दीकी के इस फैसले से सबसे बड़ा नुकसान सीएम ममता बनर्जी को पहुंच सकता है.Also Read - IAS Cadre Rules में बदलाव करने जा रही मोदी सरकार, जानें इससे क्या फर्क पड़ेगा, जिसका विरोध हो रहा है

पीरजादा सिद्दीकी द्वारा एक नई पार्टी बनाने का ऐलान करना सीएम ममता बनर्जी के लिए आगामी विधान सभा चुनाव में कई बड़ी मुश्किलें पैदा कर सकता है. दरअसल इससे पहले पीरजादा सिद्दीकी पिछले चुनाव में सीएम ममता बनर्जी के साथ खड़े थे और मुस्लिम वोटर को टीएमसी की तरफ मोड़ने में उनका अहम योगदान था. Also Read - Netaji Subhash Chandra Bose की 125वीं जयंती : राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ने दी श्रद्धांजलि, ममता ने कहा- राष्ट्रीय अवकाश घोषित करें

दरअसल रविवार को पीरजादा सिद्दीकी ने अससुद्दीन सिद्दीकी से मुलाकात की थी और इसके बाद ही उन्होंने पार्टी बनाने का ऐलान किया इस वजह से इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले विधान सभा चुनाव में वे औवैसी को बंगाल में अपना समर्थन दे सकते हैं. Also Read - UP Election 2022: यूपी में 'भागीदारी परिवर्तन मोर्चा' बना, ओवैसी, बाबू सिंह कुशवाहा और मेश्राम मिलकर लड़ेंगे चुनाव

बता दें कि पीरजादा सिद्दीकी पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में फुरफुरा शरीफ दरगाह के प्रमुख हैं और मुस्लिम वोटरों में उनकी अच्छी खासी पहुंच हैं. बंगाल में लगभग 31 प्रतिशथ मुस्लिम वोटर हैं और कहा जाता है कि राज्य में मुस्लिम वोटर जिस पार्टी की तरफ झुका सत्ता लगभग उसके हांथ में ही पहुंचती है.

पीरजादा सिद्दीकी जिस दरगाह से जुड़े हैं वहां से मुस्लिमों का अच्छा खासा प्रभाव है और कहा जा रहा है कि अगर अब्बास सिद्दीकी अपनी पार्टी बनाते हैं तो इससे सबसे बड़ा नुकसान सीएम ममता बनर्जी को ही पहुंचेगा.